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♦♦ 26 JULY : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रति दिल्ली विश्वविद्यालय के संकल्पित कदम

उच्च शिक्षा में नई दिशाएँ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के चरणों पर दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रगतिशील संघर्ष

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दिल्ली विश्वविद्यालयों की उपलब्धि बताते हुए उपकुलपति योगेश सिंह (मध्य में)

नई दिल्ली : आज दिल्ली विश्विद्यालय ने देश में बदली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. आज एक प्रेसवार्ता दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय उपकुलपति प्रोफ़ेसर योगेश सिंह, प्रोफ़ेसर के रत्नाकर (Dean Acadmic affairs), डॉक्टर विकास गुप्ता (Registrar), प्रोफ़ेसर श्री प्रकाश सिंह (Director South Campus), अनूप लाठर (Public Relations Oficer) शामिल हुए.

दिल्ली विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जिसका जिक्र इस प्रेस वार्ता में किया गया. दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में लागू की गई शिक्षा नीति भविष्य में उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर हासिल होगी। इस राष्ट्रिय शिक्षा निति 2020 के अंतर्गत विश्विद्यालय ने नए पाठ्यक्रम और शैक्षिणक संस्थानों की पहल की है.

पोस्ट ग्रेजुएशन में अवसर

एक प्रश्न के उत्तर में कुलपति ने बताया कि किसी भी अन्य विश्वविद्यालय से अगर कोई विद्यार्थी 3 वर्षीय यूजी प्रोग्राम पास कर के आता है तो दिल्ली विश्वविद्यालय में उसे 2 वर्षीय पीजी प्रोग्राम में दाखिला मिलेगा और जो 4 वर्षीय यूजी प्रोग्राम पास करके आएगा तो उसे एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम में दाखिला मिलेगा. उन्होने बताया कि विदेशी विश्वविद्यालयों से भी एमओयू साइन हो रहे हैं और ज्वाइंट डिग्री प्रोग्रामों के लिए योजना तैयार हो रही है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में 22 भारतीय भाषाओं की पढ़ाई को लेकर प्रश्न के उत्तर में कुलपति ने कहा कि विद्यार्थी पढ़ने वाले होने चाहियें उनके लिए इन भाषाओं के शिक्षक जोड़े जाएंगे. इसके लिए योजना अनुसार कॉलेजों के क्लस्टर भी बनाए गए हैं, ताकि कम विद्यार्थियों की स्थिति में संयुक्त रूप से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा सके.

प्रोफेसर योगेश सिंह (उपकुलपति दिल्ली विश्वविद्यालय)

मणिपुर हिंसा पीड़ित छात्रों को राहत
मणिपुर हिंसा पीड़ितों के लिए डीयू तैयार
मणिपुर में हिंसाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की योजना को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि मणिपुर की दिक्कत को पूरा देश समझता है. दिल्ली विश्वविद्यालय ऐसे सभी पीड़ित विद्यार्थियों के लिए हर संभव मदद के लिए तैयार है. यदि किसी विद्यार्थी को कोई दिक्कत है तो वह डीयू प्रशासन से संपर्क कर सकता है। हम हर तरह से मदद करने के लिए तैयार हैं। अगर अलग से भी कुछ प्रावधान करने की जरूरत पड़ी तो विश्वविद्यालय उन्हें करने का प्रयास करेगा.

हिंदुइज्म का शैक्षेणिक पाठ्यक्रम 

हिन्दू स्टडीज़ को लेकर पूछे गए एक प्रश्न पर कुलपति ने कहा कि इसपर अभी काम चल रहा है. लगभग एक सप्ताह में एडमिशन पॉलिसी आ जाएगी फिलहाल यह प्रायोगिक तौर पर किया जा रहा है.

मेरिट और उम्र के आधार पर होगा सीईएस में प्रवेश
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा शुरू की गई अनूठी योजना, कॉम्पिटेंस एन्हांशमेंट स्कीम, के लिए भी रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है. मीडिया द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कुलपति ने बताया कि इस योजना के तहत कोई भी नागरिक अपने कौशल को बढ़ाने के लिए डीयू के वर्तमान प्रोग्रामों में प्रवेश ले सकता है. उन्होने बताया कि कोई भी व्यक्ति जो किसी मौजूदा पाठ्यक्रम के लिए निर्दिष्ट न्यूनतम पात्रता मानदंड और पूर्व-आवश्यकताएं, यदि कोई हो, पूरी करता है, तो सीटों की उपलब्धता के अधीन, उस पाठ्यक्रम के लिए पंजीकरण करवा सकता है. 60 वर्ष से कम उम्र वाले आवेदकों को कोर्स की अनिवार्य योग्यता के आधार पर प्रवेश किया जाएगा. वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश मेरिट और उम्र के आधार पर होगा, जहां योग्यता और उम्र को क्रमशः 70% और 30% का महत्व दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में सीटों की संख्या उस पाठ्यक्रम की कक्षा की कुल क्षमता का अधिकतम 10% या 6 सीटें, जो भी कम हो, होगी. उन्होने बताया कि किसी पाठ्यक्रम में सीईएस के तहत इन सीटों को अतिरिक्त माना जाएगा.

कक्षा में पढ़ाई सभी रेगुलर छात्रों के साथ  होगी, कोई अलग से फेकल्टी उपलब्ध नही होगी. कोर्स पूरा होने पर डिप्लोमा, सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा.

सीयूईटी से सभी प्रदेशों के विद्यार्थियों को मिल रहा उचित मौका
सीयूईटी टेस्ट को लेकर पूछे गए एक प्रश्न पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि देश में कई तरह के शिक्षा बोर्ड काम कर रहे हैं। सभी का मार्किंग सिस्टम अलग-अलग हो सकता है. इसलिए सीयूईटी से सभी प्रदेशों के विद्यार्थियों को दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए उचित मौका मिल रहा है। उन्होने कहा कि यह सीयूईटी का दूसरा वर्ष है. पिछले वर्ष के अनुभवों के आधार पर कई बदलाव हुए हैं. कुलपति ने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा टेस्ट था जिसे एनटीए ने बखूबी आयोजित करके बड़ा काम किया है. उन्होने उम्मीद जताई कि अगली बार यह इस वर्ष से भी अच्छा होगा.

675 बहु विषयक और कौशल शिक्षा के 109 पाठ्यक्रम
पत्रकार वार्ता के दौरान डीयू की डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. के. रत्नाबली ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एनईपी 2020 के कार्यान्वयन को लेकर पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी साझा की. उन्होने बताया कि दिल्ली विश्ववियालय ने स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को केंद्र में रख कर एनईपी 2020 का कार्यान्वयन शुरू किया है. इसी के अनुसार विश्वविद्यालय ने यूजीसीएफ़ 2022 तैयार किया है. इसमें 675 बहुविषयक पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं. समग्र शिक्षा के तहत कौशल शिक्षा के 109 पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। रिसर्च और इनोवेशन पर पूरा ध्यान रखा गया है.

एनईपी 2020 में नया क्या है?
यूजीसीएफ़ 2022 के अनुसार इसके अनुसार विद्यार्थी अपनी रुचि के प्रोग्राम चुने सकते हैं. अपनी शिक्षा योजना के अनुसार वह मेजर और माइनर विषय चुन सकते हैं. जैसे कि मेजर सबजेक्ट फिजिक्स के साथ माइनर के रूप में संस्कृत का चयन किया जा सकता है.

विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार कौशल पाठ्यक्रमों में से भी विकल्प चुन सकते हैं या इंटर्नशिप/अप्रेंटिसशिप/सामुदायिक आउटरीच/प्रोजेक्ट का विकल्प चुन सकते हैं। डेजीटेशन/ अकेडमिक प्रोजेक्ट या एंटरप्रेन्योरशिप का विकल्प चुन सकते हैं. समग्र शिक्षा के तहत योग्यता संवर्धन पाठ्यक्रमों के रूप में 22 भारतीय भाषाएं और ईवीएस व 26 मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. अनुसंधान और नवाचार को केंद्र में रखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने उदमोद्य फाउंडेशन की स्थापना की है.

चार वर्ष के प्रोग्राम में प्रत्येक वर्ष के बाद प्रमाणपत्र/डिप्लोमा/डिग्री/ऑनर्स डिग्री का प्रावधान किया गया है. आजीवन सीखने, अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग का भी प्रावधान शिक्षा नीति में किया गया है. व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की श्रृंखला में एक्वाकल्चर उद्यमिता, मछली पालन, मछली आहार का निर्माण, मछली प्रजनन और लार्वा पालन, सजावटी मछली उत्पादन, बायो-फ्लॉक प्रौद्योगिकी और मोती उत्पादन जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को जोड़ना शामिल है.

दिल्ली विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से दिल्ली विश्विद्यालय भविष्य की योजनाओं को समझाने में मददगार साबित हुआ है. इससे ऊंची शिक्षा को सुधारने और शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा देने में मदद मिलेगी.

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