

नई दिल्ली : दिल्लीविश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस पर ‘राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. आरएसएस के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी बतौर मार्गदर्शक संबोधित कर रहे थे.
शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका:
पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने अपने भाषण में शिक्षकों के महत्व को बड़े दर्जे से गुणवत्ता से बताया. वे कहते हैं कि शिक्षक देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका काम केवल अंकगणित और रसायन विधि के अध्ययन से ही सीमित नहीं होता, बल्कि वे नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने का भी कार्य करते हैं. इसके बिना कोई भी देश विकास की ऊँचाइयों तक पहुँचने में सक्षम नहीं हो सकता.

विकास के मापदंड:
सुरेश भैय्याजी जोशी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय चिंतन के निम्न स्तर को दर्शाते हुए कहा कि पश्चिमी देशों ने अपने विकास के मापदंडों को अपने तरीके से तय किया है, जबकि भारत की तुलना में उनका स्तर कम है. उन्होंने बताया कि श्रेष्ठता का मापदंड केवल भौतिक संपन्नता नहीं होना चाहिए, बल्कि नैतिक मूल्यों का समावेश भी होना चाहिए. इस दिशा में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों की पहचान कराते हैं.
भारतीय शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता:
सुरेश भैय्याजी जोशी ने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहे दृष्टिकोण के बारे में बात की. उन्होंने यह उद्घाटन किया कि विकास के दो पक्ष हैं – एक जो वैभव संपन्नता को मानता है और दूसरा जो मानव मूल्यों के प्रति जिम्मेदारी को प्राथमिकता देता है. भारत को अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थी मानव मूल्यों के साथ साथ वैभव संपन्नता की ओर बढ़ सकें.
शिक्षकों का महत्व:
सुरेश भैय्याजी जोशी ने शिक्षकों के महत्व को महत्वपूर्ण तरीके से बताया. वे कहते हैं कि शिक्षक निवृत्ति के बाद भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों की पहचान कराते हैं. शिक्षकों का काम केवल अंकगणित और रसायन विधि के अध्ययन से ही सीमित नहीं होता, बल्कि वे छात्रों के व्यक्तिगत और नैतिक विकास में भी मदद करते हैं.




