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♦♦ 2 JULY : गजवा-ए-हिंद: NIA की कार्रवाई से आतंकवादी मॉड्यूल का पर्दाफाश

जांच में पाकिस्तान के हैंडलरों का खुलासा: ‘गजवा-ए-हिंद’ कट्टर विचारधारा का सोशल मीडिया के माध्य से करते थे प्रचार

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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली :  2 जून 2023 राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रविवार को पाकिस्तान के संदेशवाहकों द्वारा संचालित ‘गजवा-ए-हिन्द’ नामक कट्टरपंथी मॉड्यूल के संबंध में तीन राज्यों में कई स्थानों पर छापेमारी की.

बिहार के दरभंगा में एक स्थान और पटना में दो स्थानों, गुजरात के सूरत में एक स्थान, और उत्तर प्रदेश के बरेली में एक स्थान पर एनआईए द्वारा छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान डिजिटल डिवाइस (मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड), एसआईएम कार्ड और दस्तावेज़ जैसी सामग्री को जब्त किया गया.

यह मामला बिहार पुलिस द्वारा फुलवारी शरीफ क्षेत्र के मरग़ूब अहमद दानिश @ ताहिर के गिरफ्तारी के बाद सामने आया, जिसे 14 जुलाई 2022 को बिहार पुलिस ने एफआईआर संख्या 840/2022 के तहत दर्ज किया. मामला एनआईए के संज्ञान में आते ही  इसे 22 जुलाई 2022 को दोबारा रजिस्टर्ड किया गया.  मरग़ूब को 6 जनवरी 2023 को आईपीसी और एयूए (पी) एक्ट, 1967 के विभिन्न धाराओं के तहत आरोपित किया गया था.

मामले की जांच से पता चला कि गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल के सदस्य मरग़ूब एक WhatsApp समूह ‘गजवा-ए-हिंद’ का ग्रुप एडमिन था, जिसे पाकिस्तानी नागरिक ज़ैन ने बनाया था. उन्होंने इस समूह में भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और यमनी नागरिकों को जोड़ा था, जिसका उद्देश्य भारतीय क्षेत्र में गजवा-ए-हिंद की स्थापना के लिए युवाओं को इस्लामिक कट्टरपंथी  बनाना था. आरोपी ने WhatsApp, Telegram और BiP मैसेंजर पर ‘गजवा-ए-हिंद’ के विभिन्न सामाजिक मीडिया समूह बनाए थे. उन्होंने ‘बीडीगजवा ई हिंद बीडी’ के नाम से एक और WhatsApp समूह बनाया था और इसमें बांग्लादेशी नागरिकों को जोड़ा था.

आगे की जांच से पता चला कि मामले में शामिल विभिन्न संदिग्ध लोग पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से संपर्क में थे और गजवा-ए-हिंद की विचारधारा को प्रचारित करने में शामिल थे. एनआईए की आज की छापेमारी तीन राज्यों में इन संदिग्धों के निवास स्थानों पर की गई.

अब तक की जांच में निरंतर जारी है और एनआईए की टीमें विस्तार से इस मामले की जांच कर रही हैं. इस मामले के माध्यम से पाकिस्तान द्वारा संचालित गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल के बारे में और उसके संदर्भ में अधिक जानकारी प्राप्त हो रही है।

इस घटना के बाद भारत सरकार ने अपनी सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का वादा किया है. इस घटना से एक बार फिर देश में किसी साजिश की बू  आ रही है.  देश की सुरक्षा के लिए आतंकवाद के विरुद्ध संगठनित तरीके से लड़ाई लड़ने की ज़रूरत को दर्शाती है.

इस तरह के आतंकी मॉड्यूलों के होने से पहले ही सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा इस तरह के आतंकी मॉड्यूलों के सामने आने से पहले ही सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले खुफिया अभियानों और सशस्त्र छापामारी के माध्यम से इस जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है. इसके अलावा, संदिग्ध व्यक्तियों के समूहों और संगठनों की गतिविधियों को निगरानी में रखे जाने की जरूरत है ताकि कोई भी देश की  सुरक्षा को खतरे में न डाल सके .

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि आतंकवाद एक ग्लोबल समस्या है और इसके खिलाफ संगठित रूप से लड़ना और आपसी सहयोग बढ़ाना आवश्यक है. भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी सशक्त नीतियों का प्रयोग किया है और विश्व समुदाय से सहयोग मांगा है.

इस घटना से हमें यह समझना चाहिए कि तकनीकी यूनाइट होने के बावजूद लोगों को अभी भी धर्म, राष्ट्रीयता और जाति के नाम पर भेदभाव करने की भयंकर और हानिकारक मंशा पनप रही है.

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