

नई दिल्ली : #GstFroud : दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (#AntiCorruptionBranch) ने एक बड़े जीएसटी रिफंड घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक जीएसटी अधिकारी, तीन वकील, दो ट्रांसपोर्टर और एक फर्जी कंपनी मालिक सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस घोटाले में 96 फर्जी कंपनियां शामिल हैं और जीएसटी रिफंड में 54 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।

मुख्य बिंदु:
फर्जी बिल : 718 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जीएसटी रिफंड के लिए बनाए गए।गैर-मौजूद फर्म: लगभग 500 फर्जी फर्मों ने कागजी कारोबार किया, जिसमें दवाएं और चिकित्सा सामग्री का निर्यात शामिल है।
पहचान धोखाधड़ी: पांच फर्म एक ही पैन, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर के तहत कई जीएसटीआईएन पंजीकरण के लिए पंजीकृत थीं।
फर्जी दस्तावेज: रिफंड आवेदनों में फर्जी ई-वे बिल और माल प्राप्ति के उपयोग में लाए गए।
एसीबी ने पाया कि जीएसटीओ ने 2021-22 में 404 रिफंड की मंजूरी देकर 35.51 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। ट्रांसपोर्टर्स ने भुगतान के लिए फर्जी दस्तावेज प्रदान किए, जबकि वकील फर्जी रिफंड से लाभान्वित हुए।

जांच
- जुलाई 2021: जीएसटीओ को वार्ड नंबर 22 में स्थानांतरित किया गया; 53 फर्मों ने माइग्रेशन के लिए आवेदन किया।
- 23 सितंबर, 2021: फिजिकल वेरिफिकेशन में कोई फर्म ही नहीं पाई गई ।
- 5 अक्टूबर, 2021: प्रारंभिक जांच का आदेश दिया गया।
- 6 दिसंबर, 2021: मामला एसीबी को सौंपा गया।
- 28 अप्रैल, 2023: एफआईआर दर्ज की गई।
आरोप:
- फर्जी जीएसटी रिफंड (54 करोड़ रुपये)
जालसाजी (718 करोड़ रुपये के चालान) - धोखाधड़ी (96 फर्जी फर्म)
- आपराधिक षड्यंत्र
एसीबी की जांच ने धोखाधड़ी के एक जटिल जाल को उजागर किया है, जो जीएसटी रिफंड प्रक्रियाओं में कमजोरियों को दर्शाता है।


