

- शिक्षा नीति में बदलाव के मध्य विचारधारा पर चर्चा
- शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के लिए नेटवर्किंग सहयोग की आवश्यकता पर विस्तारित चर्चा
नई दिल्ली : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) पर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग ने आयोजित किया “शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम की पुन:कल्पना” नामक एक दिवसीय पैनल डिस्कशन. इस चर्चा में 120 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो विभिन्न क्षेत्रों के अनुसंधान विद्वान, शिक्षक प्रशिक्षक और शिक्षक थे.
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पंकज अरोड़ा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और एनपीएसटी, आईटीईपी आदि के दिशानिर्देशों और संरचना का उल्लेख किया. पैनलिस्ट प्रोफेसर प्रणति पांडा ने एनईपी 2020 के विजन मिशन और शिक्षक शिक्षा पर विचार रखे. अन्य पैनलिस्ट, प्रोफेसर कौशल किशोर और प्रोफेसर वंदना सक्सेना ने भी अपने विचार रखे. प्रो. वंदना सक्सेना ने आईटीईपी पर जोर देते हुए विस्तार से बताया कि कैसे 1970 के दशक में शिक्षक शिक्षा विचार में ‘एकीकृत’ शब्द आया. उन्होंने कहा कि आईटीईपी के पायलट कार्यक्रम में भाग लेना हमारे लिए महत्वपूर्ण है.

प्रोफेसर पंकज अरोड़ा ने कहा कि “आरटीई 2009 नया नहीं है क्योंकि इसका उल्लेख पहले से ही संविधान के अनुच्छेद 45 में किया गया है जो 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की बात करता है. इसके अलावा, शिक्षक शिक्षा की चिंता केवल शिक्षकों को तैयार करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उच्च शिक्षा में ‘शिक्षा को एक अनुशासन के रूप में पहचानने’ के बारे में भी है“.
यह डिस्कशन शिक्षा नीति में बदलाव के मध्य विचारधारा पर ध्यान केंद्रित करता है और शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के लिए नेटवर्किंग सहयोग की आवश्यकता पर विस्तारित चर्चा करता है.



