

नई दिल्ली : 22 जून 2025 : इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने नया मोड़ ले लिया है। अब अमेरिका ने आधिकारिक रूप से इस संघर्ष में प्रवेश करते हुए ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—Fordow, Natanz और Esfahan—पर भीषण हवाई हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी पुष्टि की और इसे अमेरिका की सैन्य शक्ति की बड़ी उपलब्धि बताया ।
कैसे हुआ हमला?
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अमेरिकी वायुसेना ने B2 बॉम्बर्स के जरिए इन तीनों न्यूक्लियर साइट्स पर बम गिराए।
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सबसे बड़ा हमला Fordow साइट पर हुआ, जहां बमों का पूरा पेलोड गिराया गया।
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सभी अमेरिकी लड़ाकू विमान सुरक्षित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र से बाहर निकल चुके हैं और अपने बेस की ओर लौट रहे हैं ।
अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर क्यों हमला किया
अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान—पर हमला इसलिए किया क्योंकि इन स्थलों को ईरान के “खतरनाक और सक्रिय” परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखा जा रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद कहा कि इन ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकना और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना उद्देश्य था।
इजराइल-ईरान युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजराइल दोनों को आशंका थी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आशंका के चलते अमेरिका ने B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स से GBU-57 बंकर बस्टर बम गिराकर इन ठिकानों को नष्ट करने का प्रयास किया।
इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना और उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना था, ताकि पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध का खतरा कम किया जा सके ।
ट्रंप का बयान और आगे की रणनीति
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हमने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बहुत सफल हमला किया है। अब शांति की जरूरत है।” उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत की तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया में कोई और सेना ऐसा नहीं कर सकती थी ।
ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसकी सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में और बड़ा संकट पैदा कर सकती है। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप “बहुत ही खतरनाक” साबित हो सकता है और इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध फैल सकता है ।
क्या आगे बढ़ेगा युद्ध?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के इस कदम से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, ट्रंप ने फिलहाल शांति की अपील की है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
अमेरिका की इस कार्रवाई से इजराइल-ईरान युद्ध में नया मोड़ आ गया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष और बड़ा रूप लेगा या कूटनीतिक हल निकलेगा।



