

नई दिल्ली : 12 जून विश्व बाल श्रम निषेध दिवस #WorldDayAgainstChildLabour से कुछ दिन पहले दिल्ली के मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए 33 बच्चों — जिनमें 14 लड़कियाँ और 19 लड़के दोनों शामिल हैं — को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। ये सभी मासूम बच्चे उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से तस्करी कर लाए गए थे और अत्यंत अमानवीय परिस्थितियों में बंधुआ मजदूर बनाकर उनसे काम करवाया जा रहा था। सीतापुर में कई बच्चों की संदिग्ध अनुपस्थिति पर संदेह जताते हुए प्रशासन और NGO को सूचित किया।
दिल्ली की गैर सरकारी सामाजिक संस्था `सहयोग केयर फॉर यू` चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इन बच्चों को एक बंद फैक्ट्री से छुड़ाया गया। वहाँ न तो रोशनी थी, न स्वच्छ हवा और न ही बच्चों को भोजन और आराम की सुविधा दी जा रही थी। वे लगातार 12-14 घंटे तक काम करने को मजबूर थे।
इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो बच्चों को बेहतर भविष्य का झांसा देकर उन्हें गुलामी की अंधेरी गलियों में धकेल रहे थे।
यह घटना बाल तस्करी और बाल श्रम #PerfectSaveChildhood के बीच के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करती है, जिससे भारत को मुक्त करना बेहद जरूरी है।
मुंडका जैसे औद्योगिक इलाकों में सघन छापेमारी और निगरानी की सख्त जरूरत है।
सरकार और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई बच्चा किताबों और खेलों की दुनिया से छीनकर चिमनियों और फैक्ट्रियों में न झोंका जाए।


यह घटना बाल तस्करी और बाल श्रम #PerfectSaveChildhood के बीच के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करती है, जिससे भारत को मुक्त करना बेहद जरूरी है।
