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पृथ्वी के साथ भारत का संबंध: लोटस के साथ विकास का प्रतीक
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पृथ्वी से जुड़े ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश
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G-20 प्रेसिडेंसी: भारत का पर्यावरण संरक्षण में योगदान
नई दिल्ली : G-20 सम्मेलन का चिन्ह (logo) में पृथ्वी को भारत के राष्ट्रीय फूल लोटस के साथ तुलना किया है, जो चुनौतियों के बीच विकास को प्रकट करता है. जिस प्रकार कीचड़ में कमल खिलता है उसी प्रकार अनेक मुसीबतों और बुराइयों के बावजूद भी भारत अपनी विरासत को जीवित रखे हुए है.
भारत पृथ्वी के पर्यावरण के साथी के रूप में दिखाई देता है, जो प्रकृति के साथ पूरी तरह से मेल खाता है. G-20 चिन्ह (logo) के नीचे “भारत” देवनागरी लिपि में लिखा है जिसे महा उपनिषद के प्राचीन संस्कृत ग्रंथ से लिया गया है “वसुधैव कुटुम्बकम” “एक पृथ्वी · एक परिवार · एक भविष्य.” यह भारत की G-20 प्रेसिडेंसी का विषय है.
मूल रूप से, इस विषय ने सभी जीवों – मानव, पशु, पौधों और सूक्ष्मजीवों – के मूल्य की पुष्टि की है, जो पृथ्वी और बड़े ब्रह्मांड में मिलान का प्रतीक है. यह विषय लाइफ (Lifestyle for Environment) पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें उसके साथ जुड़े पर्यावरण के दायरे में प्रकृति का रूप उससे जुड़ी जिम्मेदारियां और सावधान चुनौतियों को दर्शाता है. इसमें व्यक्तिगत जीवन शैली के स्तर पर और राष्ट्रीय विकास के स्तर दोनों शामिल हैं. इससे होने वाले वैश्विक परिवर्तन के क्रियान्वयन के बारे में विचार किया जा रहा है, यह चिन्ह और विषय एक साथ एक शक्तिशाली संदेश प्रेषित करते हैं जो भारत के G-20 प्रेसिडेंसी को दुनियाभर में सभी के लिए न्यायपूर्ण और समान विकास का प्रयास कर रहा है. स्वच्छ, हरा और नीला रंग विश्व में सुखद भविष्य के परिणाम दे सकता है.
भारत G-20 प्रेसिडेंसी का एक अद्वितीय भारतीय दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहा हैं, जो आसपास के पारिस्थितिकी के साथ हमारे जीवन में एकता से रहने का एक संदेश दे रहा है.


