

नई दिल्ली, 9 जून 2025 :दिल्ली में मासूम बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले जारी हैं दिल्ली में फिर हुआ एक मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न।
दो दिन पहले दिल्ली के नार्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के दयाल पुर इलाके में एक 9 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना के 24 घंटे बाद दिल्ली के नार्थ डिस्ट्रिक्ट के सब्ज़ी मंडी के सीताशरण कालोनी में रहने वाली एक 7 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की वारदात हुई है। बच्ची ने अपनी मां को अपने साथ हुई घटना के बारे बताया । बच्ची के पिता ने PCR को इस सूचना दर्ज करवाई।
वारदात करने वाले शख्स का नाम मोहम्मद सलीम उर्फ करिया है जो बिहार के सौपोल का रहने वाला है। दिल्ली के सब्ज़ी मंडी इलाके में किराये के मकान में रहता है और राज मिस्त्री का काम करता है।
इस घटना की जानकारी मिलते ही इलाके के लोगों ने इसे पकड़ कर पीटा। पुलिस इस घटना की जानकारी मिलते ही घटना स्थल पर पहुंची और आरोपी मोहम्मद सलीम को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने पूछताछ और जांच करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
बच्चियों पर होने वाले sexual assault (यौन उत्पीड़न) को रोकना एक अत्यंत गंभीर सामाजिक, नैतिक और कानूनी चुनौती है। यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता, शिक्षा और जागरूकता का भी मुद्दा है। नीचे दो पहलुओं में समाधान दिए गए हैं: (1) समाजिक स्तर पर उपाय और (2) सरकार द्वारा लिए जाने वाले आवश्यक कदम।
(1) समाजिक स्तर पर रोकथाम के उपाय:
यौन शिक्षा (Sex Education):
- बच्चियों को छोटी उम्र से ही “Good touch” और “Bad touch” की जानकारी देना।
- लड़कों को भी यौन मर्यादा और स्त्रियों के प्रति सम्मान की शिक्षा देना।
पारिवारिक संवाद:
- माता-पिता को बच्चों के साथ खुलेपन से बात करनी चाहिए ताकि बच्चे किसी भी घटना की जानकारी दे सकें।
- बच्चों को सिखाया जाए कि किसी भी असुविधाजनक या डराने वाली स्थिति में वे “ना” कह सकते हैं।
सोशल मीडिया और इंटरनेट की निगरानी:
- बच्चियों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान देना, साइबर ग्रूमिंग को समझना और सतर्क रहना।
समाज में जागरूकता अभियान:
- गांव और शहरों में नुक्कड़ नाटक, पोस्टर, शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से जागरूकता फैलाना।
(2) सरकारी स्तर पर ज़रूरी कदम:
कानूनी सुधार और सख्ती:
- POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act) को सख्ती से लागू करना।
- Fast Track Courts की स्थापना जिससे मामलों का जल्द निपटारा हो।
- दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा (जैसे उम्रकैद या फांसी की सज़ा) देना ताकि डर का माहौल बने।
पुलिस व्यवस्था में सुधार:
- हर थाने में महिला हेल्प डेस्क और प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी नियुक्त हों।
- पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित हो – FIR दर्ज करने से मना करने पर सख्त कार्रवाई हो।
स्कूलों में सुरक्षा और शिक्षा:
- स्कूलों में नियमित यौन शिक्षा सेमिनार, काउंसलिंग और CCTV निगरानी।
- स्कूल स्टाफ और बस ड्राइवर जैसे कर्मचारियों की पूरी जांच (Police Verification) अनिवार्य हो।
समय-समय पर जाँच और समीक्षा:
- बाल कल्याण समितियाँ (Child Welfare Committees) सक्रिय रूप से निरीक्षण करें।
- NGO और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर सुरक्षा समीक्षा की जाए।
जनता की भागीदारी क्यों ज़रूरी है?
सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि यह सिर्फ पुलिस या कोर्ट से नहीं रुकेगा जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी। अगर कोई बच्चा कुछ कहे, तो उस पर विश्वास करना और तुरंत एक्शन लेना अति आवश्यक है।
“बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कानून का विषय नहीं, हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी भी है।”



