

नई दिल्ली : पूर्वी दिल्ली पुलिस का ‘ऑपरेशन ज्ञान’ सफल l एक अगवा हुए शख्स को अपहरणकर्ताओं के चुंगल से छुड़वाया । 24 नवम्बर को दुर्गेश कुमार शुक्ला ने मंडावली थाने में अपने दामाद ज्ञानेश्वर शुक्ला के अपहरण और फ़िरौती मांगने की शिकायत दर्ज करवाई ।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को जानकारी के दौरान बताया कि ज्ञानेश्वर शुक्ला एक प्राइवेट प्लेसमेंट कम्पनियों के लिए आवेदकों का साक्षात्कार लेने का व्यवसाय करते हैं । मंडावली में ऑफिस बनाया हुआ है जहाँ से ज्ञानेश्वर शुक्ला का अपहरण कर लिया गया था । अपहरणकर्ता उनकी कार भी साथ में ले गए । ज्ञानेश्वर के मोबाइल नम्बर से उनके ससुर को अपहरणकर्ता का फोम आया था जिसपर 5 लाख रुपये फ़िरौती मांगी गई थी ।
एक कारोबारी के अपहरण की खबर के बाद डीसीपी पूर्वी जिला ने एसीपी मयूर विहार सचिन कुमार सिंघल, और मंडावली थाना इंचार्ज प्रशांत कुमार के साथ मिटिंग के बाद टीम तैयार की गई । जिसमें सब-इंस्पेक्टर संजीत कुमार, हवलदार सचिन सिंह, हवलदार प्रेमपाल और सिपाही दीपक को रखा गया ।
इसके बाद इस जांच को “ऑपरेशन ज्ञान” का नाम दिया गया ।
इलाके के CCTV और कॉल डिटेल्स के जाँच जारी रही किन्तु इसी बीच अपहरणकर्ता फ़िरौती के लिए फोन भी करते रहे । कॉल की लोकेशन के अनुसार पुलिस ओखला के इलाकों औऱ वहां के जंगल में तलाश करती रही मगर अपहरणकर्ता का कोई सुराग नही मिला ।
अपहरणकर्ता इतने शातिर थे कि पीड़ित का फोन इस्तेमाल करके बन्द कर देते थे । पुलिस टीम जामिया नगर, ओखला और संगम विहार में लगातार संदिग्ध लोगों पर नजर रखे हुए थी । दूसरी तरफ अपहरणकर्ता अपने ठिकाने बदल बदल कर फोन कर रहे थे । पुलिस को सीसीटीवी और काल डिटेल्स की सहायता से श्याम नगर, ओखला फेस 3 और हरकेश नगर से चार लोगों को पकड़ा ।

इन चारों से पूछताछ से इस अपहरण की साजिश का पर्दाफाश हो गया । इस सारे अपहरण के साजिशकर्ता राजकुमार चौहान और उसका भाई राहुल थे । इन दोनों ने “स्पेशल 26” फ़िल्म की तरह “स्पेशल 6” नाम का गैंग बनाया हुआ था । जिसमें इन दो के अतिरिक्त गौरव, संतोष, प्रदीप और रामतेज शामिल थे । इस अपहरण को अंजाम देने से पहले इन्होंने फ़िल्म “स्पेशल 26” को कई बार देखकर उसकी सारी प्लानिंग जेहन में उतार ली ।इसके बाद इन्होंने अपनी टीम जिसको “स्पेशल 6” का नाम दिया था उसे फ़र्ज़ी चंडीगढ़ साइबर क्राइम सेल बताकर ज्ञानेश्वर शुक्ला के ऑफिस में छापा मार कर उसकी कार के साथ उठाकर ले गए । और फिर उसे ओखला में GB पंत पॉलिटेक्निक कर्मचारी फ्लैट में ले आये ।

यह फ्लैट एक राजकुमार चौहान की माँ के नाम से अलॉटमेंट था । कुछ दिनों पहले यह फ्लैट खाली करके गए थे । इस खाली फ्लैट की चाबी राजकुमार के पास थी ।
थाना इंचार्ज प्रशांत तुरंत GB पन्त पॉलिटेक्निक के कर्मचारी फ्लैट पहुंचे और ज्ञानेश्वर को आजाद करवा लिया । इन चारों अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी की भनक लगने के बाद इनके दो अन्य साथी प्रदीप और रामतेज फरार हो गए ।

इन चारों अपहरण कर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है । इनमें से अधिकांश आरोपी NSP नाम के समाचार चैनल से जुड़े हैं ।
इनको पूरा यकीन था जिस “स्पेशल 26” को देखकर यह प्लानिंग की गई है सौ फीसदी कामयाब होगी । मगर ACP सचिन सिंघल (IPS) के कुशल नेतृत्व और SHO प्रशांत कुमार की गहन जाँच ने अपहरण की गुत्थी सुलझा कर “ऑपरेशन ज्ञान” को सफल बनाया इसके साथ साथ अपहरण से पीड़ित ज्ञानेश्वर की सकुशल वापिसी भी हुई ।
इस ऑपरेशन में पुलिस को अपहरणकर्ताओं कद मोबाईल फोन की लोकेशन लेने में दिक्कतें आ रही थी । बाद में चारों अपहरणकर्ताओं की गिरफ़्तारी के बाद खुलासा हुआ कि अपहरणकर्ता पुराने साधारण फोन का इस्तेमाल कर रहे थे ।
“स्पेशल-6” गैंग का मुख्य आरोपी राजकुमार चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद पूसा संस्थान से कम्प्यूटर और नेटवर्किंग का कोर्स कर चुका है ।
पुलिस ने इनके पास से 1 डमी पिस्टल, पीड़ित की वेगनार कार, लेपटॉप, अपहरण के दौरान वसूल किये 89000 रुपये बरामद किए हैं ।
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