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19 NOV : तीस हजारी कोर्ट में बनेगा दिल्ली का पहला थर्ड जेंडर शौचालय

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तीस हजारी कोर्ट में मध्य और पश्चिमी दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) ने Information Board का उद्घाटन किया. इस Information Board का शुभारंभ ट्रांसजेंडर्स समुदाय के हाथों से किया गया. दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) इस बोर्ड के माध्यम से समाज में कम आय वाले लोगों को फ्री कानूनी मदद मुहैया करवाएगा. खासकर ट्रांसजेंडर्स के साथ होने वाले दुर्व्यवाहर तथा शोषण की शिकायतों पर विशेष कार्य किया जाएगा.

वहां उपस्थित न्यायधीशों ने ट्रांसजेंडर्स समुदाय को समाज ने जिस तरह से बहिष्कृत किया हुआ है इस पर चिंता जताई. तीस हजारी जिला न्यायाधीश ने थर्ड जेंडर की विषय में कहा कि “हर व्यक्ति के दिमाग में ट्रांसजेंडर के प्रति जो तस्वीर खींच गई है उसे बदलना होगा. हमारी सोसाइटी ने इनकी छवि इतनी नकारात्मक बना दी है की यह समाज में हर कदम पर पड़ताडित किए जा रहे हैं. ट्रांसजेंडर और अन्यों में केवल सोच के तालमेल न मिलने का मुद्दा है. शरीर मिला पुरुष का और सोच में स्त्री की सोच है यही सामान्य लोगों और ट्रांसजेंडर में अंतर पैदा करती हैं. ”

तीस हजारी जिला न्यायाधीश गिरीश कटपालिया संबोधित करते हुए

समाज के रवैए से क्षुब्ध वहां आए ट्रांसजेंडर्स ने अपनी उन कठिन परिस्थितियों से अवगत करवाया जिससे उनको रोज गुजरना पड़ता है. कुछ ट्रांसजेंडर्स को दिल्ली राज्य विविध सेवा प्राधिकरण ने अपने साथ कार्य का अवसर देकर उनको समाज के साथ चलने अवसर प्रदान किया है. कुछ ट्रांसजेंडर्स ने ताली और टोली को छोड़ कर अपने भविष्य की नई रहे तैयार की हैं.

खास बात यह रही की जब ट्रांसजेंडर्स ने यह बताया की उनको सार्वजनिक शौचालयों में घुसने नही दिया जाता. क्योंकि पुरुषों के शौचालयों में जाते हैं तो वहां उनके साथ छेड़ाछाड़ी होती है और स्त्री के शौचालय में इसलिए नही जाने नही दिया जाता क्योंकि उनको स्त्री की श्रेणी में नही माना जाता.
इस बात को वहां बैठे न्यायधीशों ने जब सुना तो उसी वक्त ट्रांसजेंडर्स के लिए तीस हजारी में एक विशेष शौचालय बनाने का आदेश जारी कर दिया. अब दिल्ली क्या देश में पहला ट्रांसजेंडर्स के लिए विशेष शौचालय बनाया जायेगा जिसका उपयोग केवल यही समुदाय कर सकेगा.

यह एक प्रकार से देश और राज्य की सरकारों के लिए भी संदेश होगा की शौचालय निर्माण जी प्रकिया देश में चलाई गई है उसमें इन ट्रांसजेंडर्स के अलग से शौचालयों की तरफ किसी का ध्यान ही नही है .इसी समस्या पर विशेष ध्यान देते हुए दिल्ली की जिला न्यायलय तीस हजारी ने अपने परिसर में पहली इस समुदाय के लिए शौचालय निर्माण की शुरुआत की है.

इस प्रकार से इस स्टोरी में सरकारों की तरफ से उनके प्रति अनदेखी और समाज में पड़ताड़ना के शिकार किस तरह बनाए जाते हैं उसपर यह स्टोरी है ।

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