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♦♦ 27 FEB : कंझावला कांड में दागदार हुई PCR को मिली थानों से मुक्ति । PCR को सौंपा गया स्वतंत्र कार्यभार

मुंबई पुलिस की तर्ज पर दिल्ली पुलिस पीसीआर मॉडल हुआ फ्लाप, सुल्तानपुरी अंजली कांड में पीसीआर की कार्यशैली ने पहुंचाया था पुलिस की छवि को नुकसान

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नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की पीसीआर को लोकल पुलिस थानों से अटैच करने के 18 माह पहले पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने पीसीआर यूनिट को भंग कर उसे जिला पुलिस के साथ विलय कर दिया था. उस आदेश को वर्तमान में दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने भंग कर दिया है. अब एक बार फिर पीसीआर को एक स्वतंत्र यूनिट के तौर पर काम करने के निर्देश 27 फरवरी से लागू कर दिए गए हैं.

कैसा बनाया गया नई पीसीआर का स्वरूप:
इस संबंध में पुलिस मुख्यालय से आदेश जारी हुआ कर दिए गए हैं. अब 1 मार्च से दिल्ली पुलिस की पीसीआर यूनिट स्वतंत्र रूप से केन्द्रीय पुलिस कण्ट्रोल रूम (CPCR) के अंतर्गत काम करेगी. दिल्ली के 15 जिलों में 758 पीसीआर की गाड़ियों में 5219 पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है.
पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस के ट्रेनिंग सेंटर से 4866 प्रशिक्षित पुलिस कर्मी पास आऊट होकर सक्रिय पुलिसिंग के लिए भेजे गए हैं.

कैसे हुआ पीसीआर की छवि को नुकसान:
मुंबई पुलिस की तर्ज पर दिल्ली में पीसीआर का प्रयोग निष्फल रहा. जिला थानों में पीसीआर के विलय के बाद , थानों में पुलिस स्टाफ की किल्लत बढ़ गई थी. यह भी माना जा रहा है कि थानों में पीसीआर के विलय से दिल्ली पुलिस की कार्यक्षमता बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा था.  पीसीआर यूनिट को विलय कर देने पर इसकी पारदर्शिता व निष्पक्षता खत्म हो गई थी. कमांड रूम को किसी भी घटना के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी. सुलतान पुरी में अंजली नाम की युवती केस में पीसीआर की लापरवाही ने इसकी छवि को काफी दागदार किया था.  थानों से अटैच होने से केन्द्रीय पुलिस कण्ट्रोल रूम (CPCR) से पीसीआर वाहनों को अलग करने से और थानों द्वारा संचालित पीसीआर अपने कार्यों से हट कर, अन्य पुलिस कार्यों के लिए प्रयोग में लाई जाती थी.

थानों में स्टाफ की कमी :
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा, स्पेशल सेल और सिक्योरिटी को सुधार के साथ कारगर बनाने के लिए भी भारी पुलिस स्टाफ लगाया गया. इसके परिणाम स्वरूप थानों में आने वाले मुकद्दमो और चालान निपटाने में स्टाफ की कमी से देरी होने लगी. इस समस्या का विशेषज्ञों द्वारा गहराई से विश्लेषण करने के बाद यह निर्णय लिया गया.

कब होगा स्वतंत्र PCR का संचालन :
इस आदेश के बाद पीसीआर की स्वतंत्र यूनिट को अपना कामकाज शुरू करने में तकरीबन एक महीना लगेगा. 11 मार्च को एक एक रेंज में पीसीआर काम करने लगेगी और 31 मार्च तक इसका संचालन पूरी तरह सक्रिय रूप से काम करने लगेगा. अभी अधिकारियों के बैठने के लिए ऑफिस का इंतजाम किया जा रहा है.

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