
नई दिल्ली : मध्य जिला : 31 अगस्त बीते रविवार शाम सेंट्रल दिल्ली में इंसानियत और जिन्दगी बचाने के जनून की एक मिसाल कायम हुई, जहां पुलिस अधिकारियों की हिम्मत, अदभुत साहस और तत्परता ने एक ही जगह में दो जानें बचाकर एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। यह स्टोरी है दो ऐसे बच्चों की, एक बच्चा एंबुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था, और दूसरे मासूम की, जो एक पल की चूक से गाड़ी के पिछले टायर से कुचला जा सकता था।
चहलम के मातम में फंसी जिंदगी
रविवार शाम तकरीबन साढ़े छः बजे सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट दिल्ली में शिया मुस्लिम समाज का पवित्र चहलम ताजिया जुलूस निकल रहा था। अजमेरी गेट से शुरू हुआ यह जुलूस, जिसमें लगभग 20 से 25 हजार लोगों की भारी भीड़ और सैकड़ों वाहन शामिल थे, पहाड़गंज होते हुए करबला की ओर जा रहा था। इसी दौरान देशबंधु गुप्ता रोड से गुजर रही एक एम्बुलेंस इस भीड़ में पूरी तरह फंस गई। इस एम्बुलेंस में एक गंभीर रूप से घायल बच्चा था, जो छत से पतंग उड़ाते वक्त गिर गया था और ऑक्सीजन सपोर्ट पर था । इसे जल्दी एलएनजेपी अस्पताल पहुंचना था। वक्त बीत रहा था और बच्चे के पिता की आंखों में मौत साफ नजर आ रही थी। उन्होंने हताश होकर पुलिस से गुहार लगाई।
पुलिस ने दिखाई हिम्मत
अजमेरी गेट पर मौजूद सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के एडिशनल डीसीपी श्री प्रशांत चौधरी और उनके तीन इंस्पेक्टर्स आशीष दलाल, नवीन यादव और छुट्टन लाल मीणा ने तुरंत हिम्मत दिखाई। एक तरफ जहां 25 हजार लोगों का सैलाब था, वहीं सैकड़ों वाहनों से अटी पड़ी थी सड़क। असंभव सी लगने वाली इस चुनौती के आगे उन्होंने हार नहीं मानी। अपने स्टाफ के साथ मिलकर उन्होंने लोगों को और, वाहनों को हटाना शुरू किया और लगभग 15 मिनट के अथक प्रयास के बाद एम्बुलेंस के लिए एक रास्ता यानी कॉरिडोर बनाने में सफलता हासिल की। एम्बुलेंस समय रहते अस्पताल के लिए रवाना हो गई ।
एक और मासूम को बचाया
इसी उथल-पुथल के दौरान एक और घटना ने जानलेवा मोड़ ले लिया। वाहनों को हटाते समय एक कार को पीछे करने की कोशिश की जा रही थी। तभी थाना इंचार्ज नबी करीम आशीष दलाल की नजर एक पांच साल के बच्चे पर पड़ी, जो उसी कार के पिछले टायर की ओर बढ़ रहा था। पता चला कि बच्चे के पैसे गाड़ी के पास गिर गए थे और वह उन्हें उठाने के लिए झुका। ठीक उसी पल गाड़ी पीछे होने लगी। थाना इंचार्ज नबी करीम आशीष दलाल ने बिना एक पल गंवाए फुर्ती दिखाते हुए बच्चे को खींचकर टायर के नीचे आने से पहले ही बचा लिया। एक पल की भी देरी उस मासूम की जिंदगी की आखिरी देरी हो सकती थी।

आज का दिन दिल्ली पुलिस के लिए एक अभूतपूर्व उदाहरण बन गया है। एडिशनल डीसीपी प्रशांत चौधरी और उनकी पूरी टीम ने जिस जोश, तत्परता और इंसानी जज्बे का परिचय दिया, वह प्रशंसा के योग्य है। उनकी इस हिम्मत ने न सिर्फ एक घायल बच्चे को नया जीवन दिया, बल्कि एक मासूम को मौत के मुंह से खींच लिया। अगर पुलिस की यह टीम वक्त रहते हरकत में न आती, तो आज ताजिए के मातम के साथ-साथ सड़क पर दो और मौतों का मातम होता।


