

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस के दिल्ली पुलिस, इंटरपोल, एफबीआई ने एक अंतराष्ट्रीय ऑपरेशन के दौरान चार लोगों को गिरफ्तार किया है. पिछले कुछ दिनों से IFSO, स्पेशल सेल को गुप्त मुखबिरों के माध्यम से और FBI से भी इंटरपोल के माध्यम से जानकारी मिल रही थी कि कुछ अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी आपस में साजिश रच रहे हैं और भारत, अमेरिका और संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित सह-षड्यंत्रकारियों की सहायता से युगांडा यूएस इंटरनल रेवेन्यू सर्विस, सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन, ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य अमेरिकी एजेंसियों के कर्मचारियों के रूप में कॉल सेंटर चला रहे हैं.
एक अभियुक्त पार्थ अरमरकर ने उत्तम ढिल्लों के नाम से नकली पहचान बनाई. दरअसल असली उत्तम ढिल्लों ने यूएस ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन के कार्यवाहक प्रशासक और इंटरपोल वाशिंगटन के निदेशक के रूप में कार्य किया है.
अभियुक्त पार्थ अरमरकर ने युगांडा, अफ्रीका में संचालित कॉल सेंटरों के माध्यम से पीड़ितों से 20 मिलियन अमरीकी डालर से अधिक की धोखाधड़ी की। एफबीआई और दिल्ली पुलिस ने अरमरकर के बारे में तकनीकी साक्ष्य और जानकारी साझा की, जिसके कारण दिल्ली पुलिस को अहमदाबाद, गुजरात में उसके ठिकाने की पहचान करने में मदद मिली, जहां से वह आपराधिक गतिविधियों किया करता था. वह मुख्य रूप से युगांडा के बाहर अपनी आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था.
संचालन और गिरफ्तारी
IFSO और काउंटर इंटेलिजेंस, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की कई टीमों का गठन किया गया. जांच के दौरान पार्थ अरमारकर को अहमदाबाद से गिरफ्तार किया गया। इस क्राइम सिंडिकेट के बारे में जांच के दौरान बॉस वत्सल मेहता, जो फरार चल रहा था, उसे गिरफ्तार कर लिया गया. आगे की जांच के दौरान, दो और अभियुक्तों दीपक अरोड़ा और प्रशांत कुमार, जो मुख्य साजिशकर्ता हैं उसको उत्तराखंड से पकड़ा गया है. यह सभी लंबे समय से एफबीआई के राडार पर थे.
संयुक्त कार्रवाई के तहत, एफबीआई ने अब तक 50 से अधिक शिकायत करने वालों से पूछताछ. उनसे 20 मिलियन अमरीकी डालर से अधिक की धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं. स्पेशल सेल सीपी एचसीएस धालीवाल ने बताया कि ये लोग विक्टिम को फोन करते थे कि मेक्सिको बॉर्डर पर जांच के दौरान कुछ बच्चो से जुड़ा पोनोग्राफी मटेरियल मिला है, इसमें उनका भी नाम जुड़ा रहा है,जुर्माना भरना होगा या बड़ी करवाई होगी.



