


नई दिल्ली : 23 सितम्बर 2023 : आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन 2023 का उद्घाटन किया। इस अधिवक्ता सम्मेलन उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न कानूनी विषयों पर सार्थक संवाद और चर्चा करना है. इस सम्मलेन में इंग्लैंड के लॉर्ड चांसलर, श्री एलेक्स चाक और बार एसोसिएशन ऑफ इंग्लैंड के प्रतिनिधि शामिल हुए. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कानूनी विचारों और अनुभवों के साझा करने का है. प्रधानमंत्री ने विदेशी व्यक्तियों का भारत में स्वागत किया और उनका योगदान की सरहना की.

प्रधानमंत्री ने कानूनी बिरादरी के महत्व को बताया और न्यायपालिका और बार को भारत की न्यायिक प्रणाली के संरक्षक के रूप में सराहा. उन्होंने महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, बाबू राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक और वीर सावरकर के योगदान को महत्वपूर्ण बताया. पीएम मोदी ने कहा कि “कानूनी पेशेवरों की भूमिका ने स्वतंत्र भारत की नींव को मजबूत किया और वर्तमान न्यायिक प्रणाली का विश्वास बढ़ाया.”
इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के कानूनी विषयों पर सार्थक चर्चा और विचारों का मंच उपस्थित करना है. प्रधानमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए, महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की सफल योजना की सराहना की. प्रधानमंत्री ने भारत के चंद्रयान 3 के सफल उतरने को गर्व से याद किया, जिससे भारत विश्व का पहला देश बन गया जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल उतरा. प्रधानमंत्री ने भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य के लिए सक्रिय रूप से काम करने की प्रतिज्ञा की. उन्होंने न्याय प्रणाली को मजबूत, स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और विश्व को इससे शिक्षा लेने का अवसर मिलेगा.

प्रधानमंत्री ने आपसी संबंधों के महत्व को बताया और विश्व की कई ताकतों की उपस्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की. उन्होंने विश्वभर में साइबर आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरों के बारे में चर्चा की. वे एक वैश्विक रूपरेखा की मांग करते हैं जो विभिन्न देशों के कानूनी ढांचों को जोड़ती है.
प्रधानमंत्री ने वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के महत्व को उजागर किया और इसके लाभों की बात की. उन्होंने भारत सरकार के द्वारा विवाद समाधान की अनौपचारिक परंपरा को सराहा और लोक अदालतों के महत्वपूर्ण योगदान का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने भाषा और कानून की सरलता को महत्वपूर्ण माना और नए कानूनों को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया. भारत की न्यायिक प्रणाली में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की सराहना की.
प्रधानमंत्री ने तकनीकी प्रगति के माध्यम से न्यायिक प्रणाली को सुधारने का आह्वान किया और कानूनी पेशेवरों को तकनीकी सुधारों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. भारतीय अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय अधिवक्ता सम्मेलन 2023 का विषय है “न्याय वितरण प्रणाली में उभरती चुनौतियां.” चर्चाएं उभरते कानूनी प्रचलन, सीमा पार मुकदमेबाजी, कानूनी प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय कानून आदि विषयों पर होगी.
कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी. वाई. चंद्रचूड़, केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, भारत के अटॉर्नी जनरल श्री आर. वेंकटरमणी, भारत के सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता, अध्यक्ष अधिवक्ता परिषद श्री मनन कुमार मिश्रा और ब्रिटेन के लॉर्ड चांसलर श्री एलेक्स चाक भी शामिल थे.



