

एयर इंडिया की फ्लाइट 171, #Airindiafligt जो अहमदाबाद से लंदन गेटविक के लिए रवाना हुई थी, उड़ान भरने के 33 सेकंड के भीतर ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भयावह हादसे में 265 से अधिक लोगों की जान चली गई, जिनमें 242 यात्री और चालक दल के 12 सदस्य शामिल थे। इस दुर्घटना में चमत्कारिक रूप से एकमात्र यात्री, 40 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक विश्वाश कुमार रमेश , जीवित बचे।
विश्वाश कुमार रमेश, जो कि ब्रिटिश नागरिक हैं और भारत में अपने परिवार से मिलने आए थे, इस हादसे में अकेले जीवित बचे। वे अपने बड़े भाई अजय कुमार रमेश (45) के साथ यात्रा कर रहे थे, जिनकी इस दुर्घटना में मृत्यु हो गई। रमेश विमान में 11A सीट पर आपातकालीन द्वार के पास बैठे थे।
यह भीषण दुर्घटना गुरुवार दोपहर को उस समय हुई जब फ्लाइट ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। 33 सेकंड के भीतर ही विमान में तेज धमाका हुआ और वह मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल के पास गिरकर ध्वस्त हो गया।
विमान दुर्घटना स्थल अहमदाबाद एयरपोर्ट की परिधि से ठीक बाहर, एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल के पास स्थित था। गिरने के बाद विमान में आग लग गई जिससे अधिकांश यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
हालांकि हादसे के असल कारणों की जांच अभी जारी है, परंतु प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार उड़ान भरते ही तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। पायलट ने उड़ान के तुरंत बाद ‘Mayday’ संदेश जारी किया था। DGCA, एयर इंडिया और बोइंग की संयुक्त टीम द्वारा जांच शुरू की जा चुकी है। ब्लैक बॉक्स भी बरामद हो चुका है।
विश्वाश कुमार रमेश ने खुद हादसे की कहानी साझा करते हुए बताया, “जैसे ही विमान टूटा, मेरी सीट भी अलग हो गई और नीचे गिरते समय मेरी सीट आग से दूर रही। मैंने होश में आते ही बेल्ट खोला और टूटी खिड़की से बाहर निकल आया।” उन्हें एक स्थानीय नागरिक ने देखा और तुरंत एम्बुलेंस में अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल वे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हादसे की जगह और अस्पताल जाकर विश्वाश कुमार रमेश से मुलाकात की और राहत कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने ट्वीट कर हादसे को “दिल दहला देने वाला दृश्य” बताया।



