
नई दिल्ली : देश मे कोरोना संक्रमित मरीज़ो की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है उसके मद्देनज़र बड़ी तायदाद में लोगो की जाँच को भी बढ़ाया जा रहा है किन्तु जांच की बढ़ती संख्या के चलते जांच रिपोर्ट का वक्त पर ना मिलना, टेस्टिंग की रिपोर्ट को तैयार करने में काफी वक्त लगाना और मरीज़ो को कोविड़-19 की जांच का रिजल्ट देर से पता लगाना ये सब कोरोना को नियंत्रित करने में बाधक बन रहा था । अब इस समस्या से निजात दिलाने के लिए DRDO ने इंडो-इजरायल संयुक्त नॉन इनवेसिव कोविड़-19 रेपिड टेस्टिंग तथा शोध कार्यशाला की शुरुआत दिल्ली के LNJP हॉस्पिटल में की है ।
इस शोध कार्यशाला में इजरायल और भारतीय वैज्ञानिक मिलकर कोविड़-19 की टेस्टिंग पर कार्य करेंगे ।
28 अगस्त से 6 अगस्त तक यह प्रोग्राम चलेगा । इस प्रोग्राम में 18 वर्ष की आयु से ऊपर के लोग वोलियन्टर के रूप में हिस्सा ले सकते हैं, इसके लिए उन्हें अपना ID प्रूफ दिखाना होगा । इस प्रोग्राम के दौरान वोलियन्टर के 2 टेस्ट करवाए जायेंगे पहला RT-PCR के द्वारा और दूसरा क्वांटम । इनके सैंपल के जरिए वैज्ञानिकों का ये ट्रायल करने का मकसद यह है की ताकि उनको अगर इस covid-19 का पता चल जाए तो आगे टेस्टिंग के लिए RT-PCR की ज़रूरत ना पड़े और टेस्ट की रिपोर्ट भी जल्दी मिल जाए । यदि भारतीय व इजराइल के वैज्ञानिकों का ट्रायल सफल रहा तो आगे आने वाले दिनों में बहुत ही अहमियत रखेगा क्योंकि किसी को कोई अंदाज़ा नहीं है की कोरोना महामारी कब तक रहने वाली है और कब तक इससे हमे लड़ना होगा ।


