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ख़ास चर्चा…ख़ास मेहमान से : क्या सुशांत सिंह मामले में राजनीती के हालातों से जूझ रही है पुलिस ?

सुशांत सिंह मामले की जांच CBI को सौंप देनी चाहिए : पंकज चौधरी (आईपीएस )

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दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह प्रकरण में पंकज चौधरी (आईपीएस) द्वारा विधिक,क़ानूनी व राजनीतिक पक्ष के `शाबाश सिपाही’ के संवाददाता द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब।

पंकज चौधरी (आईपीएस ) Email : rajasthansystem@gmail.com

 

 

संवाददाता : अभिनेता सुशांत सिंह प्रकरण में अब शंकाओं औऱ आरोप तथा प्रतिरोप का दौर चल रहा है किंतु इन शंकाओं के क्या तथ्य हैं ?

पंकज चौधरी : मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस के बीच फँसा मामला,घटना स्थल मुंबई, जाँच का केंद्र बिंदु मुंबई , मुंबई कांग्रिस समर्थित सरकार , बिहार भाजपा समर्थित सरकार,बिहार में जल्द चुनाव, दिवंगत सुशांत सिंह के चचेरे भाई नीरज सिंह राजनीति में है,मुंबई पुलिस और फ़िल्म इंडस्ट्री का गहरा रिश्ता ,सत्ता के साथ मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री का ख़ास रिश्ता ,भाई भतीजावाद के आरोप पहले भी फ़िल्म इंडस्ट्री पर लगते रहे हैं ।

संवाददाता : सुशांत सिंह की मौत का मामला बहुत की हाई लाइटेड मामला है जिसपर मीडिया से लेकर बड़े बड़े राजनेताओं की नज़र है ऐसे में मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल क्यों ?

पंकज चौधरी : सुशांत सिंह फ़िल्म इंडस्ट्री का एक चमकता सितारा थे,विशेषकर बिहार से आने वाले सुशांत सिंह के लिए मुंबई की दुनिया आसान नहीं थी, इन परिस्थितियों में सुशांत सिंह प्रकरण निष्पक्ष जाँच का विषय है पर जिस प्रकार से पटना सिटी एसपी *IPS* अधिकारी को मुंबई पहुँचते ही *14* दिन के लिए *BMC* द्वारा क्वॉरंटीन कर दिया गया वो संदेह अवश्य पैदा करता है । सुशांत सिंह के पिता द्वारा पटना में दर्ज *FIR की कॉपी जिसमे प्रथमद्रष्टया समस्त घटना मुंबई, बहुत थोड़ी घटना दिल्ली,हरियाणा व पटना की कोई घटना नहीं दिखती है. *CrPC के Chapter XIII Jurisdiction Of Criminal Courts In Inquiries And Trials* की धारा *177 से 184* विवेचना/ट्रायल आदि विषयक है.

संवाददाता : बिहार पुलिस द्वारा FIR दर्ज होने के बावजूद ऐसे कौन कौन से कमजोर पहलु रह गए जिससे बिहार पुलिस को अपनी जांच में दिक्कतें पेश आ रही हैं, क्या दोनों राज्यों की पुलिस राजनीति के हालतों से जूझ रही है ?

पंकज चौधरी : CRPC की उक्त धारा 177  से  184  व इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार इस मामले में पटना में जीरो  FIR होना तो सही दिखता है, पर मेरी समझ के अनुसार पटना पुलिस को ज़ीरो FIR  दर्ज कर मुंबई भेजनी चाहिए थी और आपसी समन्वय से जाँच पूरी करनी थी पर क़ानूनी रूप से उसे इसकी विवेचना का विधिक अधिकार स्पष्ट नहीं दिखता है और प्रथमद्रष्टया CRPC  में दिए गए विधिक अधिकारों का व्यतिक्रम प्रतीत होता है। जो बिहार पुलिस के पक्ष में नहीं है पर मुंबई पुलिस पर अब पहले  से दबाव ज़्यादा बड़ा हो गया है।पुलिस राजनीति से बाहर नहीं है और आज देश के अधिकतर IPS अधिकारियों को राजनेताओं के आंखों की पुतलियों करवट को देखना पड़ता है, वही मीडिया इस महत्वपूर्ण  व संवेदनशील प्रकरण  को संकीर्ण राजनीति  से निकालकर निष्पक्ष जाँच कराने  की भूमिका तैयार करती है या महज़ ये TRP का विषय होगा ये देखना बाक़ी है ।

संवाददाता : इस सारी घटना का अब स्वरूप का दिखाई दे रहा है ?
पंकज चौधरी : इन परिस्थिति में दिवंगत सुशांत सिंह प्रकरण अब राजनीतिक हो गया है साथ ही दो बड़े राज्यों की पुलिस आमने सामने हो गयी है जो देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।पुलिस अब दो राज्यों की राजनीति का टूल बन गयी है जो नितांत खेदजनक है।देश सुशांत सिंह के असली गुनहगारों व क़ातिलों को जानना चाहता है पर अब ये मामला प्रशासनिक और पुलिस जाँच का विषय कम राजनीतिक ज़्यादा हो गया है ।
वर्तमान समय जब दो राज्यों की पुलिस आपस में उलझ गयी है वहाँ मेरी समझ से या तो माननीय सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई जाँच का आदेश दे देना चाहिए या महाराष्ट्र सरकार को स्वतः सीबीआई जाँच का अनुमोदन केंद्र को कर देना चाहिए ताकि दो राज्यों की पुलिस की किरकिरी ना हो और दिवंगत सुशांत सिंह  प्रकरण में न्याय हो और पुलिस की इज्जत भी बनी रहे ।

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