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UPSC सिविल परीक्षा में हिंदी के परिणाम चिंताजनक : पंकज चौधरी ( IPS)

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पंकज चौधरी (IPS) rajasthansystem@gmail.com

नई दिल्ली : UPSC Civil Service Exam 2019 : पिछले कुछ वर्षों में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली है। वर्ष  2019* की यूपीएससी का अंतिम रिज़ल्ट आ गया, इसबार पुनः हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी हाशिए पर रहे । जैसा रिज़ल्ट से स्पष्ट है 300 रैंक के भीतर कोई भी हिंदी माध्यम का चयनित उम्मीदवार नहीं है। इस समूचे मसले पर IPS पंकज चौधरी ने जायज राय व ज्वलंत सवालों के जवाब दिए …

संवाददाता : देश मे हिंदी भाषा की हैसियत क्या है ?
पंकज चौधरी : हिंदी भाषा को लेकर देश में समय समय पर आंदोलन,सेमिनार,रीसर्च व चर्चाएँ होती रही है पर इसका विशेष प्रभाव नहीं दिख रहा है। आज जहाँ सरकारी स्कूल, कॉलेज की तरफ़दारी हो रही है परंतु धरातल पर हिंदी भाषा को निम्न स्तर का दर्जा दिया जाता है, यह बात सर्वविदित है। हमें ज़रूरत है इसके मूल कारणों में जाने की जहाँ हिंदी के लिए प्रयास हो रहे पर धरातल पर इसका विपरीत परिणाम दिख रहा है।

संवाददाता : UPSC की परीक्षा देने के वक्त आपके सामने क्या अनिश्चितताऐं सामनें आई ?
पंकज चौधरी : मुझे बरबस याद है वर्ष 2008 का यूपीएससी का साक्षात्कार जिसमें मुझे 300 के साक्षात्कार में मात्र 105 अंक हासिल हुआ था इसके विपरीत मेरे सभी करीबी मित्रों व शुभचिंतकों ने हिंदी माध्यम की बजाय अंग्रेज़ी माध्यम से मुख्य परीक्षा व साक्षात्कार देने का सुझाव दिया था। उस वक्त मुझे सिर्फ़ इस बात पर आपत्ति थी की मैंने सरकारी, प्राइवेट हर संस्थान में पढ़ाई की क्योंकि पिता जी राज्य सिंचाई विभाग में  जूनियर इंजीनियर थे तो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश में छोटे छोटे अंतराल पर कई ट्रान्स्फ़र होने से हर प्रकार के संस्थान में पढ़ने का मौका मिला चाहे वो कोटद्वार का प्राइमरी स्कूल था या भदोही का सरस्वती शिशु या विद्या मंदिर हो , प्रतापगढ़ का सेंट ऐन्थॉनी कॉन्वेंट स्कूल हो या बनारस का उदय प्रताप कॉलेज हो, हिंदी इंग्लिश साथ-साथ रही । पर ये ज़रूर रहा हिंदी को मैंने सहज रूप से जितने क़रीब से आत्मसात किया उतना इंग्लिश को नहीं कर पाया था ।

संवाददाता :UPSC की परीक्षा के दौरान आपने  हिंदी को वरीयता दी मगर अंग्रेजी को भी गौण नही आंका जा सकता ?पंकज चौधरी :  यह एक ज़ाहिर सी बात है UPSC Exam  का प्री, मेन व साक्षात्कार सभी जगह हिंदी में पेपर दिया गया पर इतना ज़रूर था की ज़रूरत की इंग्लिश सीख ली थी और हाँ ये बता दूँ वर्ष 2009 का साक्षात्कार मैंने अपने स्वविवेक से हिंदी माध्यम  से ही दिया और उस वर्ष हिंदी माध्यम  से साक्षात्कार में पूरे देश में सर्वाधिक अंक *230/300* हासिल किया ।

संवाददाता : क्या सरकार की हिंदी  के प्रति इसे असहिष्णुता या यूं कहें की हिंदी  लापरवाही है  ?
पंकज चौधरी :  हम हर वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मानते है और खानापूर्ति कर आगे बढ़ जाते है और जब देश की सर्वोच्च सेवा UPSC Exam का रिज़ल्ट आता है तो हिंदी माध्यम के तमाम उम्मीदवारों की दशा पर विचार शुरू कर देते है , पर ये भूल जाते है यह एक पॉलिसी का विषय है जिसपर शिक्षा मंत्रालय , UPSC , GOI को ध्यान देना है , जिस प्रकार सरकारों के लिए काम की कई वरीयता है उसी प्रकार जब सरकार और सम्बंधित संस्थाओं के लिए हिंदी रुचि और पॉलिसी का विषय होगा तो यह निश्चित है हमसभी को हिंदी को लेकर रोना-धोना नहीं पड़ेगा , पर इसके लिए ठोस पहल की ज़रूरत है और समय रहते यह कदम उठाने जरूरी हैं ।

संवाददाता : आपके UPSC के चयन के बाद 2019 तक हिंदी तथा अंग्रेजी के उम्मीदवारों के चयन आंकड़ों पर प्रकाश डालिये ।
पंकज चौधरी :  मैं एक बार दिल्ली वर्ष 2015 में UPSC चयनित उम्मीदवारों को सम्मानित करने के एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा था और मंच से यही बात बार बार दोहरायी गयी की कुल लगभग 1000 चयनित में हिंदी माध्यम के मात्र 50 कैंडिडट थे और आज पुनः 2019 यूपीएससी के रिज़ल्ट को देखने पर यह पाया गया की कुल 827 में लगभग 50 ही हिंदी माध्यम से है और टॉप 300 में हिंदी माध्यम का कोई कैंडिडट नहीं है ।

पिछले दस वर्षों में UPSC की सिविल परीक्षा के परिणामों की दर 6 या इससे भी कम प्रतिशत रह गई है ।
2018 में चयनितों 370 उम्मीदवारों में से 8 उम्मीदवारों ने परीक्षा हिंदी में दी थी। 2013 में 268 सफल उम्मीदवारों में से 34 ने हिंदी में परीक्षा दी थी। हिंदी माध्यम के विश्वविद्यालयों से पढ़े उम्मीदवारों का चयन कम हुआ है।

संवाददाता : UPSC की परीक्षाओं में हिंदी उम्मीदवारों के गिरावट का सिलसिला कब से शुरू हुआ  ?
पंकज चौधरी :  2011 में सीसैट को शामिल कर दिया गया उसके तत्पश्चात हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों में गिरावट का सिलसिला तब शुरू हो गया था । 2013 में सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में भी बदलाव हुआ। छात्र दो वैकल्पिक विषय को चुन सकते थे। 400 अंकों का सामान्य अध्ययन और 200 अंकों का सीसैट होता है। हिंदी माध्यम के छात्र अंग्रेजी कंप्रीहेंसन के सवालों में फंस जाते हैं क्योंकि इनके अनुवाद जटिल होते हैं। सफलता के ग्राफ की बात करें तो हिंदी माध्यम के चयनित उम्मीदवार 2013 में 17 प्रतिशत थे जो 2018 तक 2.16 प्रतिशत रह गए थे ।

हिंदी भाषी राज्यो में स्कूली शिक्षा के लिए सरकारी स्कूल आधार होते हैं । जहाँ अंग्रेजी को दूर की कौड़ी समझा जाता है । ऐसे स्कूलों के बच्चे शहरों के कॉन्वेंट में पढ़ने वाले छात्रों का कैसे मुकाबला कर सकते हैं । भारत देश की आजादी के बाद भी अंग्रेजी भाषा की दासता में जी रहे लोगों की कामयाबी की सीढ़ी अंग्रेजी को माना जाता है ।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति की घोषणा करते हुए 5 कक्षा तक मातृ भाषा में पढ़ाई करने की बात कही । यदि सरकार हिंदी को बच्चे की शिक्षा नींव में ईंट की तरह रखना चाहती है तो नींव में अंग्रेजी ईंट क्यों रखवाई जाती है ।
ख़ैर हम फिर विचार करेंगे , सोंचेंगे , जल्द 14 September को हिंदी दिवस मनाएँगे और अगले हिंदी दिवस और UPSC रिज़ल्ट का इंतज़ार करेंगे पर जिनको इस दिशा में अमूलचूल परिवर्तन करना है उनकी रुचि का विषय हिंदी नहीं है । प्रभु श्री राम से निवेदन व कामना है की प्रभु देश के शीर्ष कर्णधारों को सदबुद्धि दें ताकि मृतप्राय हिंदी भाषा को नया जीवन व सम्मान मिल सके और मात्रभाषा की महिमा सदा बनी रहे ।

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