कश्मीरी गेट सनसनीखेज लूट और हत्या का मामला, पैसों के लालच में निकला मृतक का भाई मास्टरमाइंड, 3 गिरफ्तार, 1 नाबालिग पकड़ा गया
नई दिल्ली 29 सितंबर : राजधानी दिल्ली के प्राचीन और ऐतिहासिक माने जाने वाले कश्मीरी गेट इलाके में गत 24 सितंबर 2026 की शाम जो हुआ, उसने सबको दहला दिया। नीली छतरी मंदिर के पास हुई एक वारदात ने साबित कर दिया कि कई बार अपनों की ही नीयत में खोट आ जाती है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में दिल्ली पुलिस ने एक हफ्ते के भीतर ही पर्दाफाश करते हुए मृतक के भाई (बुआ का बेटा) समेत तीन आरोपियों को दबोच लिया है और एक नाबालिग को भी पकड़ लिया है।
24 सितंबर की शाम करीब 7:20 बजे, मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी सचिन अपने चाचा प्रभात के साथ गांधी नगर मार्केट से दुकानों की पेमेंट वसूलकर ई-रिक्शा से लौट रहे थे। जैसे ही उनका ई-रिक्शा नीली छतरी मंदिर अंडरपास (सलीमगढ़ किले के पीछे) पहुंचा, चार सशस्त्र बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने प्रभात के हाथ से नकदी से भरा बैग छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर बदमाशों ने ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया। इस खूनी हमले में प्रभात बुरी तरह घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कौन थे आरोपी और कैसे रची साजिश ?
डीसीपी (उत्तर जिला) निहारिका भट्ट (IPS) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने के लिए थाना कश्मीरी गेट और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीमें बनाई गईं। पुलिस ने जब 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया, तो एक संदिग्ध मारुति स्विफ्ट कार पर नजर पड़ी जो फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूम रही थी।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने पर एक ऐसा मोबाइल नंबर मिला जो मृतक के संपर्क में भी था और मुख्य आरोपियों में से एक दीपू के संपर्क में भी था। जांच में पता चला कि यह नंबर किसी और का नहीं बल्कि मृतक प्रभात के बुआ के बेटे ओम ही का था।
कहाँ और कैसे बिछाया गया जाल ?
पुलिस ने तुरंत उत्तर प्रदेश के कानपुर और झांसी के लिए टीमें रवाना कीं। ओम को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने सनसनीखेज खुलासा किया। ओम ने ही अपने चचेरे भाई प्रभात के पैसों के आने-जाने की पूरी जानकारी मास्टरमाइंड् दीपू को दी थी। इसके बाद झांसी से दीपू और एक नाबालिग को, जबकि एटा से अभिषेक को दबोच लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल 2,29,800 रुपये नकद बरामद कर लिए हैं।
उत्तर जिला की डीसीपी निहारिका भट्ट (IPS) ने सनसनीखेज खुलासे पर कहा, “यह बेहद चौंकाने वाला मामला था जहाँ खून का रिश्ता ही पैसे के लालच में कातिल बन बैठा। हमारी संयुक्त टीमों ने दिन-रात एक करके 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। आरोपी ओम ने अपने चचेरे भाई की रेकी कर अपराधियों को इनपुट दिया था। हमने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी तीन फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।”
क्यों दिया वारदात को अंजाम?
पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने नोएडा में मिलकर इस लूट और हत्या की खौफनाक साजिश रची थी। प्रभात पहले से ही मुख्य आरोपी अनिर्वाण चौहान को जानता था क्योंकि वह ओम के गांव आया करता था। पैसों के लालच में अपनों ने ही मौत का यह जाल बिछाया था।
पुलिस के हाथ अभी भी तीन अन्य शातिर अपराधी लगे नहीं हैं जो इस साजिश में शामिल थे। पुलिस की कई टीमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं ताकि बाकी के फरार आरोपियों को भी जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके और बचे हुए कैश की बरामदगी की जा सके। इस खुलासे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध कितना भी शातिर तरीके से क्यों न किया जाए, खाकी की नजरों से बच नहीं सकता।



