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19 January : #HeroInUniform ड्यूटी से बढ़कर इंसानियत: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के सब इंस्पेक्टर ने सड़क हादसे में बचाई युवक की जान

रात्रि ड्यूटी खत्म करने के बाद घर लौटते समय सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल ने दिखाई संवेदनशीलता, समय पर अस्पताल पहुंचाकर बचाई अनजान युवक की जिंदगी

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#DutyBeyondUniform “डर नहीं, संवेदनशीलता बचाती है ज़िंदगियाँ”  घायल युवक के इलाज के वक्त सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल

19 जनवरी/ नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस #DelhiPolice : की वर्दी सिर्फ कानून लागू करने का प्रतीक नहीं, बल्कि इंसानियत निभाने की जिम्मेदारी भी साथ लेकर चलती है। इसका जीता-जागता उदाहरण नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट के पार्लियामेंट सर्किल में तैनात दिल्ली यातायात पुलिस #DelhiTraifficPolice के सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल हैं ।
घटना 18 जनवरी 26 तारीख की रात करीब 11 बजे की है, जब सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल अपनी रात्रि ड्यूटी समाप्त कर द्वारका स्थित अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में, दिल्ली कैंट क्षेत्र के नांगल गांव स्थित बाबा पीर के पास उन्होंने एक गंभीर सड़क दुर्घटना का दृश्य देखा। सड़क पर एक युवक जिसकी पहचान बाद में समीर के रूप में हुई  खून से लथपथ, नाजुक हालत में पड़े थे। उनकी चोटें इतनी गंभीर थीं कि तत्काल चिकित्सकीय मदद के बिना उनकी जान जाना तय थी।
मौके पर मौजूद लोग खड़े रहकर तमाशा देख रहे थे लेकिन कोई आगे बढ़कर मदद करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। ऐसे समय में, ड्यूटी खत्म होने के बावजूद, सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल ने इंसानियत को प्राथमिकता दी। उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रोकी, घायल युवक को सावधानीपूर्वक उठाया और अपनी निजी गाड़ी से नज़दीकी दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल के डॉक्टर्स के मुताबिक, समीर को समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई ।फिलहाल वह सुरक्षित हैं और परिवार के साथ हैं।

कर्तव्य वर्दी से आगे भी जारी रहता है 
सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल #HeroInUniform का यह कदम इस बात को साबित करता है कि पुलिस का कर्तव्य सिर्फ ड्यूटी के घंटों में सीमित नहीं होता। संकट की घड़ी में वर्दी उतारने के बाद भी इंसानियत निभाना ही असली सेवा है।
समीर के परिजनों ने भावुक होकर कहा, “हमारे लिए कन्हैया लाल भगवान से कम नहीं हैं। अगर वह समय पर मदद नहीं करते, तो हम अपना बेटा खो देते।”

समाज के लिए मिसाल
यह घटना न केवल एक साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी है, बल्कि उस भरोसे की भी, जो आम नागरिक और पुलिस के बीच होना चाहिए। जब पुलिसकर्मी इस तरह आगे आकर मदद करते हैं, तो समाज में कानून व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी मजबूत होती है।
सड़क हादसों में अक्सर ‘गुड सेमेरिटन’ बनने से लोग हिचकिचाते हैं। लेकिन यह मामला याद दिलाता है कि

चुप्पी नहीं, संवेदनशीलता ज़िंदगी बचाती है

जब यह संवेदनशीलता पुलिस के हाथों से दिखाई दे, तो लोगों का विश्वास और भी गहरा हो जाता है।
सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल की यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की छवि को और सकारात्मक बनाती है। यह कहानी हर नागरिक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि संकट में मदद करना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है।

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