

नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए मशक्कत कर रहे हैं. मगर इस चुनावी दंगल में दिल्ली के सरस्वती वार्ड नंबर 58 से एक असल पहलवान महिला दीपिका देशवाल चुनावी अखाड़े में अपने विपक्षी पार्टी के प्रत्याशियों को धोबी पछाड़ मारने के लिए तैयार हैं. दीपिका का पसंदीदा दांव भी यही है. जो अक्सर अपने प्रतिद्वंदी पहलवान पर इस्तेमाल करती है. एक ख़ास बात यह है दीपिका के पिता दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं जो बादली थाने में तैनात हैं.

दीपिका देशवाल राज्य स्तर की धाकड़ पहलवान है जो छः बार राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती में गोल्ड मेडल जीत चुकी है. खेलों के अतिरिक्त दीपिका ने छात्र जीवन के दौरान राजनीति की तरफ कदम बढ़ा दिया था. दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कालेज से 2009 से चुनावी दंगल में उतर कर कालेज स्तर में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की, इसके पश्चात 2010 में विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनावों में NSUI के टिकट पर EC का चुनाव जीती, LLM करने के बाद पंजाब सरकार में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से DAG के पद पर प्रतिनियुक्त (Deputation) किया गया. किंतु निगम चुनावों के चलते सरकारी नौकरी को त्यागपत्र देकर सक्रिय सियासत में हांथ अजमाने आ गई हैं.

2014 के दौरान दिल्ली नगर निगम में स्थाई परिषद रही. अभी फिलहाल दिल्ली विश्विद्यालय से बौधीज्म से पीएचडी कर रही हैं. दीपिका के प्रचार में खेलों के बहुत से खिलाड़ी शामिल हुए हैं. दीपिका के प्रचार में कांग्रेस का कोई दिग्गज नेता शामिल नहीं हुआ है इसके बावजूद भी अपने सामाजिक कार्यों के दम पर अपने प्रचार में लगी हुई है ।

प्रचार के दौरान लड़कियां दीपिका से आत्मरक्षा के गुर सीखती हुई
दीपिका देशवाल ने दिल्ली नगर निगम काम करने वाले बिल्डिंग डिपार्टमेंट में भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने का वादा किया. इसके अतिरिक्त पार्कों में सैर करने वालों के लिए कंक्रीट के ट्रैक बदल कर अमेरिका के पार्कों की तर्ज पर सॉफ्ट ट्रेक बनवाना, आवारा, जानवर, पशुओं की समस्या से निजात, इलाके के युवाओं के लिए स्पोर्ट्स क्लब या मिनी स्टेडियम का निर्माण, महिलाओं के लिए आत्मरक्षा केंद्रों की शुरुआत आदि कई सिविक मुद्दों पर चुनाव लडने बात कही.
दीपिका देशवाल के पिता दिल्ली पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर हैं और वह अपनी बेटी के निर्णयों पर कभी आड़े नहीं आए. हालांकि लोग कहते हैं की पहलवानी करने के लिए शारीरिक ताकत की जरूरत होती है और राजनीति करने के लिए चाणक्य जैसी तीक्ष्ण बुद्धि चाहिए. दीपिका देशवाल का कहना है उसमें बल और बुद्धि दोनों ही मौजूद हैं, ऐसे में देशवाल अपने सामने दोनों पार्टी के उम्मीदवारों को पटखनी देने के लिए कौन सा नया पैंतरा इस्तेमाल करती है यह आने वाला वक्त बताएगा.
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