
नई दिल्ली : #Gujrat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी #Narender Modi ने गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर #Dwarkadhish Temple दर्शन के लिए गहरे पानी में गोता लगा कर अपने आप को एक दिव्य स्नान किया. उन्होंने यह कहकर इसे “एक दिव्य अनुभव” बताया कि “वह महसूस कर रहे थे कि वे आध्यात्मिक प्राचीन युग से जुड़े हुए हैं”. उन्होंने इस अनुभव की तस्वीरें भी साझा की. पीएम मोदी की तस्वीरों को गहरे समुन्दर के अंदर से लिया गया है, जिसमें पीएम गोताखोर की पौशाक पहने हुए हैं.

पीएम मोदी के लिए यह न केवल जल के माध्यम से एक यात्रा कि बल्कि उनकी ऐसी यात्रा थी, जो द्वारका के गौरवपूर्ण भूतकाल और हिन्दू धर्म के प्रमुख आराध्य भगवान श्री कृष्ण के साथ जुड़ी हुई थी.
पीएम मोदी ने समुद्र में समाई हुई उस सनातन विरासत को भी श्रद्धांजलि दी, जो अपने समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ आज भी लोगों की भावनाओं को मोहित करता है, और आज विशेष रूप से समाई हुई स्थिति में उन्होंने इस हालात में भी मोर की पंखों को भी स्थापित करके श्रद्धापूर्वक नमन किया दी. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन किए.
द्वारका नगरी का इतिहास
5000 साल पहले भगवान कृष्ण ने द्वारका नगरी बसाई थी। यह उनका निजी महल और हरिगृह था, द्वारका नगरी पवित्र सप्तपुरियों में से भी एक है. कई द्वार होने इसे द्वारावती भी कहा जाता है .
हरिवंश पुराण के अनुसार कुशस्थली के उजाड़ होने के बाद श्रीकृष्ण के आदेश पर मयासुर और विश्वामित्र ने यहां एक भव्य नगर का निर्माण किया जिसका नाम द्वारिका रखा गया. यहां भगवान श्री कृष्ण ने 36 साल तक राज किया। उनके देहांत के दौरान द्वारका नगरी समुद्र में डूब गई और यादव कुल नष्ट हो गया.
एक मान्यता यह की कौरव वंश नष्ट होने पर गांधारी जो घृतराष्ट्र की पत्नी थी और दुर्वासा ऋषि के श्राप से यदुवंश समाप्त हो गया था और द्वारका सागर में समा गई थी.



