
नई दिल्ली : चंडीगढ़ मेयर चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने संविधानिक मूल्यों और न्याय की स्थापना को बचाने का संकेत दिया। कोर्ट ने निर्वाचन अधिकारी को धांधली का दोषी माना है कोर्ट ने अपनी टिप्पणी करते हुए कहा कि “अधिकारी की सफाई ठीक नही है कि खराब मतपत्रों पर उसने अलग से निशान बनाया. और उसने कोर्ट के सामने भी झूठा बयान दिया है”. कोर्ट ने निर्वाचन अधिकारी की ओर से घोषित चुनाव परिणाम को रद्द किया। कोर्ट की जिम्मेदारी बनती है कि पूर्ण न्याय करें ताकि चुनावी लोकतंत्र बचा रहे. आठ मतपत्र जो अमान्य करार दिये गए, हकीकत में वो आप पार्षद के पक्ष में डाले वोट थे. कोर्ट ने पुराने चुनाव परिणाम को रद्द किया और आप उम्मीदवार कुलदीप कुमार को चंडीगढ़ के मेयरको विजयी घोषित किया कर दिया है.
कोर्ट ने निर्वाचन अधिकारी अनिल मसीह को अवमानना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को 3 हफ्ते में जवाब मांगने को कहा है.
CJI ने कहा कि वीडियो देखने के बाद सामने आया है कि रिटर्निंग अफसर अनिल मसीह ने कुछ बैलेट पेपर पर एक खास निशान लगाया था. सभी 8 वोट याचिकाकर्ता उम्मीदवार (कुलदीप कुमार) को गए थे. रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह ने वोट को अमान्य करने के लिए निशान लगाए. हमने आरओ को उसके कृत्य में गलत पाए जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी. पीठासीन अफसर ने स्पष्ट रूप से अपने अधिकार से परे काम किया. बता दें कि 19 फरवरी को मसीह ने कोर्ट में कहा कि उसने डिफेस हुए 8 बैलेट पर निशान लगाया था.
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी के मनोज सोनकर ने 16 वोटों से जीत हासिल की थी. उन्होंने आम आदमी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को शिकस्त दी थी, जिनको 12 वोट मिले थे. जब रिटर्निंग अधिकारी अनिल मसीह ने गठबंधन सहयोगियों के आठ वोटों को अवैध घोषित कर दिया, तब मामले में विवाद खड़ा हो गया. जिसके बाद बैलेट पेपर में छेड़छाड़ का आरोप लगाया जाने लगा.



