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दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना के आदेश ने बचाई एक विलक्षण प्रतिभाशाली छात्र की जान

दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना से मांगी गई थी ट्विटर पर मदद

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दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना

नई दिल्ली : इस ब्रह्मांड में हर वस्तु गतिमान है । उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी सुख दुख के रूप में बदलाव आते रहते हैं ।कोरोना की इस महामारी ने बहुत से इंसानों के जीवन में अचानक कई आश्चर्यजनक बदलाव किये हैं । लोगों को आर्थिक रूप से चोट तो लगी है मगर बहुत से परिवार कोविड से  अपने करीबियों के खोने से मानसिक रूप से इतने गमजदा हुए की उनके जीवन का रास्ता ही बदल गया ।

कार्तिक के जीवन का घटनाक्रम
एक 10 वीं कक्षा का छात्र कार्तिक (बदला हुआ नाम ), आयु तक़रीबन 15 वर्ष, एक विलक्षण प्रतिभा का मेधावी छात्र, तकनीकी विषय की जानकारी ऐसी की बी-टेक की परीक्षा में बैठने की काबलियत रखता है । एक दिन इसकी जिंदगी में ऐसा तूफान आया जो इसकी सारी खुशियाँ उड़ा कर ले गया । इसी वर्ष अप्रैल में कोरोना महामारी से पिता का निधन हो गया । उसी दौरान इस लड़के के अन्य सगे सम्बन्धी भी करोना से काल के गाल में समा गए । पिता और अपनों की मौत से इस लड़के दिल पर ऐसा सदमा लगा की जिसने उसकी मनोदशा बिगाड़ दी और एक दिन परिवार वालों को बिना बताए घर से चला जाता है ।

कार्तिक (बदला हुआ नाम)

 दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने लिया संज्ञान 
29 अक्टूबर को दिल्ली के द्वारका डिस्ट्रक्ट के कंझावला पुलिस स्टेशन पर इस लड़के के परिवार ने इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई । 1 नवंबर को वरुण जैन नाम के शख्श ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना व समस्त दिल्ली के डिस्ट्रक्ट डीसीपी को अपने ट्वीटर हैंडल से ट्विट टैग किया । इसके बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने तुरंत सभी डिस्ट्रक्ट डीसीपी को कार्तिक (बदला हुआ नाम) की तलाश में निर्देश जारी कर दिए ।

नार्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस टीम की तफ्तीश 

दिल्ली के नार्थ डिस्ट्रक्ट की कंप्यूटर सेल के पास यह ट्वीट पहुंचा । यह सेल गुमशुदगी के मामलों की मॉनिटरिंग कर कार्यवाही करता है । इसके इंचार्ज एएसआई विनोद वालिया ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा निर्देशित संदेश पर कार्यवाही शुरू कर दी । हालांकि इसमें दिल्ली के कई जिलों की पुलिस भी अपने अपने तरीके से जुटी हुई थी । एएसआई विनोद वालिया, हवलदार शिवराज, सिपाही आशीष की टीम ने कार्तिक के परिवार से सम्पर्क किया । पुलिस को परिवार ने बताया कि कार्तिक साईकिल लेकर शाम से निकला था और रात तक वापिस नही लौटा । कार्तिक के बारे में बताया कि वह टेक्नोलॉजी विषय का विलक्षण प्रतिभाशाली छात्र है । 10वीं कक्षा का छात्र होने के बावजूद भी बीटेक की परीक्षा में बैठने की क्षमता रखता था । कार्तिक ने ओमान में टैक्नोलॉजी सेमीनार में भारत का भी प्रतिनिधित्व किया था ।  कोरोना से पिता की मौत के बाद यहप गुमसुम रहने लगा ।

विनोद वालिया (  एएसआई, नार्थ डिस्ट्रिक्ट)   कार्तिक की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 
नार्थ डिस्ट्रक्ट की टीम ने कार्तिक द्वारा  इस्तेमाल किये जाने वाले डिवाइसेज ( कम्प्यूटर, मोबाइल) के डेटा को खंगालना शुरू किया । कार्तिक अपने मोबाइल को भी घर ही छोड़ गया था,  पुलिस ने उसकी कम्प्यूटर, मोबाइल पोस्ट को पढ़ना शुरू किया तो उसमें पता चला वह आध्यत्म और लोक परलोक, गहन योग विषयों का अध्ययन करता था । उसके डेटा से गुरूपूर्णिमा पर खास, रहस्यमय अनुष्ठान और मृत्यु के बाद पुर्नजीवन के लेख मिले हैं । कैलास पर्वत व मृत्यु और जन्म को लेकर भगवान बुद्ध के योग दर्शन के पोस्ट भी मिले । उसकी पोस्ट से लगा यह किसी खोज में है और उसी मिशन की खोज में निकल चुका है । कार्तिक की सभी पोस्टों को पढ़ने के बाद पुलिस को यह मामला  2 जुलाई 2018 में बुराडी में  एक परिवार द्वारा 11 सदस्यों द्वारा की गई आत्महत्या के कारणों से मिलता जुलता लगा । क्योंकि उसमें भी दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को आध्यत्म से जुड़े मृत्यु व मृत्यु से वापसी के लेख मिले थे ।

सीसीटीवी से जांच :
तहकीकात की दूसरी कड़ी में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इकठ्ठी की गई । इन फुटेज में कार्तिक साइकिल पर जाता दिखाई दिया । पुलिस ने उसकी रुट मैपिंग बनाई । एक सीसीटीवी कैमरे में द्वारका इलाके के साईं मंदिर में जाता दिखाई दिया । पुलिस ने अनुमान लगांया की यदि इस प्रकार के अध्यात्म की खोज में निकला है तो जरूर जाने से पहले मन्दिर, शमशान आदि में पूजा प्रार्थना की होगी ।

पुलिस जांच  की दूरदर्शिता :
एएसआई विनोद वालिया ने कार्तिक की साइकिल की गति का विश्लेषण करते हुए अंदाजा लगाया गया कि कार्तिक ने एक दिन में 40 किलोमीटर तक सफर तय किया होगा क्योंकि वह रोज़ की साइकलिंग करने वाला नहीं था। 
साधारण तौर से 4 दिन में धार्मिक नगरी हरिद्वार तक पहुंचा जा सकता है । पुलिस को प्राप्त सीसीटीवी कैमरे के रूट मैप में दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले मार्गों पर उसकी तस्वीरें नजर आई । पुलिस की टीम कार्तिक के परिजनों के साथ रात को हरिद्वार के लिए रवाना हो गई। पुलिस की इस कार्यवाही में कार्तिक के परिजनों ने निजी तौर पर काफी सहयोग किया।

सीसीटीवी में साईकिल पर जाता हुआ कार्तिक 


पुलिस की हरिद्वार में पड़ताल
नार्थ डिस्ट्रक्ट टीम के हवलदार शिवराज और सिपाही आशीष और कार्तिक के परिजन भी हरिद्वार रात को हरिद्वार पहुंच गए । वहाँ के अखाडों  मठों, आश्रमों, और मेडिटेशन सेंटरों, चाय की दुकानों पर उसकी तस्वीरों को दिखाया गया, पोस्टर बांटे गए लोगों ने उसको पहचान उनकी अलग अलग थानों पर उपस्थिति बतलाई गई किन्तु हरिद्वार में पुलिस को कार्तिक नही मिला।

पुलिस को मिली सफलता ते
पुलिस टीम और कार्तिक के परिजनों को इस बात का संतोष तो हो गया था कि कार्तिक अभी तक जीवित है तथा हरिद्वार में या उसके आसपास है । तलाश करते करते सभी ऋषिकेश पहुंच गए । दोनों  पुलिसकर्मियों ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए निर्णय लिया कि भोर (सुबह) होते खोज की जाएगी । पुलिस को अंदाजा था कि सुबह चाय नाश्ता, खान पान के लिए जरूर कहीं कहीं आएगा । सुबह का उगता सूरज पुलिस की कामयाबी का संदेश लेकर आया । कार्तिक ऋषिकेश के लक्ष्मण झूले के पास मिल गया । इसके बाद पुलिस ने उसे अपने संरक्षण में ले लिया । कार्तिक जिस साइकिल से यहाँ पहुंचा था वह भी चोरी हो गई थी ।

मिलने के बाद अपनों से गले लगता कार्तिक 

पूछताछ के बाद खुलासा
कार्तिक के मिलने के बाद कार्तिक ने खुलासा किया कि कोरोना में अपने करीबियों खो देने के बाद वह आध्यत्म की राह पर चलने लगा । उसने मान लिया था  कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा पाठ में सिद्धि के बाद विशेष काल, तिथि में मृत्यु के बाद फिर मनुष्य जीवित हो सकता है ।  

कार्तिक की खोज में नार्थ दिल्ली पुलिस की इस तीन लोगों की टीम ने जिस प्रकार से अपनी जाँच में एक एक तथ्यों को जुटा कर दूरदर्शी सोच के साथ कार्तिक को ढूंढ निकालने में कामयाब हुए हैं, नार्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने वक्त रहते खोज निकाला, वरना हो सकता था बुराड़ी जैसा अध्यात्म से जुड़ा सामूहिक आत्महत्या काण्ड ! इसे पुलिस की एक दुर्लभ खोज कहाँ जा जाना चाहिए। अब एक सवाल यह भी खड़ा हो गया है ! कोरोना महामारी के बाद जो लोग कार्तिक की तरह मानसिक त्रासदी झेल रहे हैं ऐसे लोगों को काउंसिलिंग की बेहद जरूरत है इस स्तिथि में सरकार क्या कदम उठाएगी ?

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