
नई दिल्ली : पैन इंडिया कानूनी जागरूकता (Pan India Legal Awareness) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण *NALSA) का आउटरीच अभियान अब अंतिम चरण की ओर अग्रसर है ।
न्याय व्यवस्था का लाभ हर व्यक्ति को प्राप्त हो इसी उद्देश्य को लेकर 45 दिनों से दिल्ली के 11 जिलों में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) द्वारा अभियान चलाया जा रहा है ।

लोगों को न्याय के प्रति जागरूक करने के लिए न्याय की यात्रा, आसरा, कला न्याय के लिए, न्याय की भोर जैसी अलग अलग सोच को लेकर लोगो को जागरूक करने के लिए को लेकर दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है ।
आज नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में न्याय को कला के माध्यम से दर्शाया गया । *कला न्याय के लिए और न्याय की भोर* इस कार्यक्रम का नाम दिया गया । ‘न्याय की भोर’ का शुभारंभ हाई कोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी, सत्र न्यायाधीश दिनेश शर्मा (अध्यक्ष डिस्ट्रक्ट), आर के वधवा (अध्यक्ष नई दिल्ली बार एसोसिएशन, पटियाला हाउस) न्यायाधीश कंवजीत अरोड़ा (सदस्य सचिव DLSA) न्यायाधीश गौतम मनन (विशेष सचिव DSLSA) ने सामुहिक दीप प्रज्वलित करके किया ।


इस अवसर पर कोर्ट परिसर में *कला न्याय के लिए* कला प्रदर्शनी लगाई गई । यहां बनी पेंटिंग्स में प्रत्येक उम्र, वर्ग के व्यक्ति के न्याय पाने के अधिकारों को बहुत सुंदर ढंग से चित्रित किया गया।


इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हाई कोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी ने दिल्ली के जिलों में नियुक्त कानूनी अधिकार के इस जागरूकता अभियान से जुड़े DLSA के 11 डिस्ट्रक्ट के सचिवों को न्याय की मशालें थमाई । इन न्याय की मशालों के मायने यही हैं कि अन्याय व शोषण का अंधकार दूर हो और न्याय की रोशनी हर कोने तक पहुंचे ।

इस मौके पर जस्टिस विपिन सांघी ने कहा कि *न्याय की भोर* का वास्तविक अर्थ यही है कि अब सभी को न्याय की रोशनी प्राप्त हो । कोई भी गरीबी और खराब आर्थिक हालतों के चलते न्याय पाने से वंचित न रह पाए ।

DLSA अब कानूनी मदद के साथ साथ लोगों की सामाजिक सेवाओं (Social Services) के माध्य्म से राहत देने का कार्य कर रहा है । *आसरा* अभियान इसी परिपेक्ष्य में एक पहल है, जिसमें सड़कों, फुटपाथों खुले आसमान में रह रहे बेघरों को सरकारी रेन बसेरों में रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं ।

नई दिल्ली DLSA अभियान के सचिव सुमित आनंद का कहना है “लोगों तक यह संदेश जब तक नही पहुंचेगा की सरकार की ओर से निःशुल्क कानूनी साहयता का भी प्रावधान है तब तक समाज अन्याय, व शोषण का शिकार होता रहेगा । DLSA इसी परिपाटी को बदलने के लिए नई सोच (Thought) के साथ लोगों को न्याय की परिधि में बनाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है ।


