
संग्रह’ योजना को परिभाषित किया जाए तो यह पुलिस को उस क्षेत्र में रहने और कार्य करने वाले नागरिकों के साथ एक मज़बूत संबंध स्थापित करने और एक ही उद्देश्य कानून व्यवस्था के साथ सुरक्षा को स्थापित करना है.
नई दिल्ली : Community Policing : दिल्ली पुलिस ने 2008 में सूचनाओं को इकठ्ठा करने के लिए एक योजना बनाई थी जिसका नाम दिया गया था । दिल्ली पुलिस की आंख कान योजना । इस वक्त के दिल्ली पुलिस कमिश्नर वाई एस डडवाल की यह एक कामयाब योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के शुरू होते ही सैंकड़ों सनसनीखेज मामलों में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए सैंकड़ों नागरिकों को पुरुस्कृत किया गया.
अब चौदह वर्ष बाद दिल्ली में आबादी के साथ साथ अपराध का ग्राफ भी बढ़ा है. नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस के उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने चौदह वर्ष पूर्व की योजना का अपग्रेड वर्जन ‘संग्रह’ तैयार किया है जो पुलिस तंत्र का जनता से सीधे अपराध और आतंकवाद से संबंधित खुफिया जानकारी एकत्र करने का माध्यम बनाया गया है.

इस ‘संग्रह’ में दुकानदार, रेहरीवाले, ऑटो और टैक्सी ड्राइवर, ऑटो मकैनिक, हलवाई, डिलीवरी बॉय, गलियों में प्रेस करने वाले धोबी, केबल टीवी ऑपरेटर व डिश टीवी वाले, इलेक्ट्रीशियन, फिलिपकार्ट व अमेजोन के सप्लाई करने वाले, फ्रिज ठीक करने वाले, गैस सप्लाई करने वाले, गार्ड, इंटरनेट कनेक्शन लगाने वाले, गार्ड, मजदूर, कबाड़ी, दूधवाले, मैरिज फोटो ग्राफर, मोबाइल शॉप वाले, सड़क पर चलती फिरती दुकान वाले, अखबार बांटने वाले, पार्किंग वाले, प्लंबर, कारपेंटर, प्रॉपर्टी डीलर, रिक्शा चालक, पुरानी कार खरीदने बेचने वाले, सब्जी, फल फ्रूट बेचने वाले, सफाई कर्मचारी, कार की सफाई करने वाले, OLA, UBER के कार चालक, जोमेटो, स्वीगी चौकीदार के रूप में कार्यरत नागरिक और साइबर कैफे और गेस्ट हाउस के मालिक सहित तकरीबन 1751 सामुदायिक समाज को सूचनाओं को जुटाने के लिए संग्रहित किया गया हैं.

संग्रह में शामिल हर नागरिक बिना वर्दी वाला पुलिसकर्मी है. इस योजना से सामुदायिक पुलिसिंग से पुलिसकर्मियों और नागरिकों के बीच की दूरी को इस हद तक कम करना है कि पुलिसकर्मी उस समुदाय का एक एकीकृत हिस्सा बन जाए जिसकी वे सेवा करते हैं।
यह पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी को कम करने में मदद कर रहा है क्योंकि इसके लिये पुलिस को अपराध की रोकथाम और अपराध का पता लगाने, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने तथा स्थानीय संघर्षों को हल करने हेतु समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता होती है, जिसका उद्देश्य जीवन और सुरक्षा की भावना की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करना है।
संग्रह में शामिल हर नागरिक बिना वर्दी वाला पुलिसकर्मी है. इस योजना से सामुदायिक पुलिसिंग से पुलिसकर्मियों और नागरिकों के बीच की दूरी को इस हद तक कम करना है कि पुलिसकर्मी उस समुदाय का एक एकीकृत हिस्सा बन जाए जिसकी वे सेवा करते हैं.
यह पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी को कम करने में मदद कर रहा है क्योंकि इसके लिये पुलिस को अपराध की रोकथाम और अपराध का पता लगाने, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने तथा स्थानीय संघर्षों को हल करने हेतु समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता होती है, जिसका उद्देश्य जीवन और सुरक्षा की भावना की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करना है.
‘संग्रह’ में शामिल नागरिकों को अपराध की गंभीरता के आधार पर नकद राशि से पुरुस्कृत भी किया जाता है. सदर बाजार निष्काम वेलफेयर एसोसिशन के अध्यक्ष हरजीत सिंह छाबड़ा, कारोबारी बनवारी लाल भमभोरिया, हरीश कुमार एडवोकेट कम्युनिटी पुलिसिंग का एक उदाहरण हैं.




