

कोरोना काल में आर्थिक तंगी से न जाने कितने लोग अपराधी बन गए। अब न तो जब्बात रहे और ना ही रिश्ते ! एक सगे चाचा ने अपनी आर्थिक तंगी मिटाने के लिए दे डाली अपनी ही मासूम भतीजी के अपहरण की सुपारी।
पूर्वी दिल्ली : कल शकरपुर इलाके में दो वयक्ति एक कारोबारी तरुण गुप्ता की 4 साल की बच्ची को किडनेप करके प्लसर पर भाग रहे थे, तो बच्चा चोर समझकर लोगों ने बहादुरी व हिम्मत का परिचय देते हुए इनको धक्का दे दिया एक ने बाइक के आगे स्कूटर खड़ा कर दिया । बाइक गिरते ही यह किडनैपर सिर पर पैर रखकर भाग खड़े हुए, यह बाइक, बच्ची और बैग छोड़ कर भाग गए। पुलिस को मौके से जो बैग मिला उसमे हथियार भी थे।
बच्ची के अपहरण के मामले पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू दी। पुलिस ने 12 घंटे में पता लगा लिया की इस वारदात के पीछे किसका हाँथ है। दरअसल तरुण गुप्ता नाम के कारोबारी की बच्ची को जो लोग किडनेप के लिए आए थे वो उसके भाई उपेंद्र ने भेजे थे यह भाड़े के अपहरणकर्ता थे उत्तर प्रदेश से बुलाये थे। पुलिस ने उपेंद्र के एक दोस्त धीरज को भी गिफ्तार किया है। धीरज ने अपहरणकर्ताओं को अपनी मोटरसाइकिल मुहैया करवाई थी साथ ही उसमें फ़र्ज़ी नंबर प्लेट लगवा कर दी। थी। यह सारा खेल उपेन्दर ने पैसों के लिए किया था। अपने भाई की चार साल की बच्ची का अपहरण करवाकर उसकी ऐवज में मोटी रकम की फिरौती मांग करनी थी। इस बच्ची का अपहरण का प्लान कई दोनों से बन रहा था, इसके लिए कई दिनों से इन अपहरणकर्ताओं ने तरुण के घर की रैकी भी की थी। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में यह अपहरणकर्ता रैकी करते दिखे हैं।
उपेन्दर ने अपने पिता का पैसा मैच, सट्टा नशा और अन्य अयाशियों में पैसा उड़ा दिया उसे 37 लाख रूपये की जरूरत थी इसलिए अपनी भतीजी के अपहरण की सुपारी दे डाली। पुलिस ने मोटर साइकिल के सहारे पहले धीरज को पकड़ा इसके बाद धीरज ने सारी बात पुलिस के आगे उगल दी। इस काण्ड के मुख्यारोपी उपदेन्द्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया।उत्तर प्रदेश से जो बदमाश अपहरण के लिए बुलाये गए थे उन फरार बदमाशों की तलाश में टीमें भेजी हुई हैं


