
नई दिल्ली : कई दशक पहले एक फिल्म बनी थी `चाचा भतीजा’ जो फ़िल्मी पर्दे पर बड़ी सफाई से जुल्म करके बच निकलते थे। उत्तरी दिल्ली के कोतवाली थाना पुलिस के दो बड़े बदमाश हत्थे चढ़े हैं जो असल जिंदगी में चाचा भतीजे हैं । पुलिस ने इनको बड़े ही फ़िल्मी स्टाइल में पकड़ा है। जाँच से पता चला इन दोनों बदमाशों के जुर्म की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है।
उत्तरी जिले के चांदनी चौक इलाके में कई दिनों से स्नैचिंग, लूटपाट की लगातार वारदातें हो रही थी। पुलिस को बताया गया मोटरसाइकिल पर अपराधी वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। इनकी लूटपाट का सिलसिला कई दिनों से चल रहा था।
कोतवाली थाना इंचार्ज राजीव भारद्वाज ने इनको पकड़ने के लिए एक खास योजना बनाई। एक पुलिस टीम तैयार किया गया, जिसमे हवलदार अमित तेवतिया, हवलदार जितेंदर, हवलदार पवन को इसका जिम्मा सौंपा गया।
पुलिस ने उस जगह पर अपना जाल बिछाया जहाँ यह लोग ज्यादातर वारदातों को अंजाम देते थे। यह तीनों हवलदार बिना वर्दी भेष बदल कर वारदात करने वाली मोटरसाइकिल की ताक में मोर्चा संभाले रहे। पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार बदमाशों को पकड़ने के लिए सारा इंतजाम कर रखा था, जरूरत पड़ने पर पीछा करने के लिए वाहनों को सतर्क किया हुआ था।
पुलिस की मेहनत रंग लाई कल शाम लोहे के पुल के पास एक मोटरसाइकिल जिसपर दो लोग सवार थे उन्होंने किसी को रोकर मारपीट शुरू कर दी इसके उसका सामान छीन कर भागने लगे। उस वक्त आसपास सिविल में घूम रहे इन हवलदारों ने दूर से यह वारदात को अपनी आँखों से देखा और सारी कहानी भाँप ली। पुलिस ने इनको रोकने के लिए मोटरसाइकिल को आगे लाकर रोका तो उन्होंने टक्कर मार कर गिरा दिया। आगे तीसरे हवलदार ने इनको रोकने के गाडी को अड़ा दिया। इन्होने गाडी में टक्कर मारी और मोटरसाइकिल सहित गिर गए, तब तक पुलिस ने इनको धरदबोचा। पूछताछ से पता चला यह उमेश और अजय नाम के दोनों चाचा भतीजे हैं जिनपर लूटपाट, स्नैचिंग के तकरीबन 50 से ज्यादा मुकददमे दर्ज हैं। उमेश अजय का चाचा है। यह रोजाना यमुना लोहे के पुल के सुनसान इलाके में अकेले शख्स को लूट लिया करते थे। वारदात की फिफ्टी बनाने वाले चाचा भतीजे को पुलिस ने अपनी सूझबूझ से जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।


