दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस० एन० श्रीवास्तव नार्थ ईस्ट दिल्ली लोगों के बीच होली की मिठाई भेंट करते हुए
नई दिल्ली :नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में सम्प्रदायिक दंगों के दौरान बिगड़ी कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए, 26 फ़रवरी 2020 को अचानक गृह मंत्रालय ने 1985 बैच AGMUT कैडर के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी एस० एन० श्रीवास्तव को कानून और व्यवस्था अधिकारी के रूप में दिल्ली पुलिस ने नियुक्त कर दिया। पूर्व दिल्ली पुलिस आयुक्त अमुल्य पटनायक की अवकाश प्राप्ति के बाद एस० एन० श्रीवास्तव को दिल्ली पुलिस का कार्यकारी आयुक्त के तौर पर दिल्ली पुलिस की कमान सौंपी गई है।
एस० एन० श्रीवास्तव को जिस वक़्त कानून व्यवस्था पर काबू पाने के लिए लाया गया उस वक्त दिल्ली में हिंसा का खतरा चारों और मंडरा रहा था। एक दिल्ली पुलिस का एक हवलदार और आई बी अधिकारी अंकित की इस हिंसा में जान जा चुकी थी और एक पुलिस उपायुक्त अमित शर्मा जिंदगी मौत की लड़ाई लड़ रहे थे। उस साम्प्रदायिक हिंसा में उस दौरान दो दर्जन ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी और हिंसा से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा था।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस० एन० श्रीवास्तव नार्थ ईस्ट दंगा प्रभावित क्षेत्रों में होली की मिठाई भेंट करते हुए
एस० एन० श्रीवास्तव ने रोजाना इलाके की संवेदनशील कालोनियों का दौरा शरू कर किया उस दौरान जनता से संवाद भी किया करते थे । होली आने से पहले दिल्ली की सोइ पड़ी अमन कमेटियों को दोबारा से जाग्रत कर दिया गया । दिल्ली के प्रत्येक थाना क्षेत्र में हर सम्प्रदाय के लोगों से मिलकर शान्ति बनाये रखने की अपील की गई। पुलिस की यह कोशिश रंग लाई और होली का त्यौहार दिल्ली में हर्षोउल्लास और शांति पूर्ण ढंग से मनाया गया। होली के दौरान सारी दिल्ली में किसी भी प्रकार हिंसा की घटना नहीं घटी । उस दौरान खुद पुलिस आयुक्त ने दिल्ली के प्रत्येक कौने कौने में जाकर कानून व्यवस्था का जायजा लिया ।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस० एन० श्रीवास्तव होली के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को मिठाई भेंट करते हुए
होली के दौरान ड्यूटी पर तैनात अपने कर्मचारियों से रुबरू होकर उनका हौसला बढ़ाते रहे। दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी किया। वहां की जनता के बीच जाकर उन्हें होली की मिठाइयां भेंट की पुलिस आयुक्त ने ऐसा करके पब्लिक के पार्टी सकारात्मक सोच का परिचय दिया। इस प्रकार एस० एन० श्रीवास्तव ने अपने नेतृत्व के प्रारम्भिक काल में दिल्ली की जिंदगी को पुनः उसी पटरी पर लाकर खड़ा कर दिया है जिस प्रकार पहले अमन और प्रेम भाईचारा हुआ करता था।
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