
कनेक्शन अपडेट करने के नाम पर 72 साल के बुजुर्ग से की थी ठगी; 24 घंटे में 1,000 किलोमीटर का सफर तय कर उत्तर प्रदेश के तीन जिलों से दबोचे गए आरोपी, म्यूल अकाउंट और फर्जी सिम कार्ड का हो रहा था इस्तेमाल।
नई दिल्ली : देशभर में साइबर अपराध के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस की साइबर नॉर्थ टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर मुल्जिमों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह आम जनता को ठगने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) यानी जन सेवा केंद्रों की आड़ का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई से लगभग 2.50 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन और काले कारनामों का खुलासा हुआ है।
बुजुर्ग को झांसा देकर उड़ाए 1.99 लाख रुपए यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने साइबर थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने टाटा पावर (TPDDL) में अपने बिजली कनेक्शन और मीटर में नाम बदलवाने के लिए आवेदन किया था। 18 जुलाई को उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर कहा कि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें महज 13 रुपए की फीस चुकानी होगी।
इसके बाद ठग ने बुजुर्ग के व्हाट्सएप पर ‘TATA POWER NAME: CHANGE.apk’ नाम से एक मैलवेयर फाइल भेजी और उसे इंस्टॉल करने को कहा। बुजुर्ग ने झांसे में आकर जैसे ही फाइल डाउनलोड की, उनके पंजाब नेशनल बैंक (PNB) खाते से 1,99,003.54 रुपए उड़ गए। पीड़ित की शिकायत पर दिल्ली के साइबर नॉर्थ थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई।
1,000 किलोमीटर का सफर और 24 घंटे में तीन गिरफ्तारियां मामले की गंभीरता को देखते हुए नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की पुलिस उपायुक्त (DCP) निहारिका भट्ट के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने लगभग 100 संदिग्ध मोबाइल नंबरों, IMEI नंबरों और बैंक खातों की बारीकी से तकनीकी जांच की।
तकनीकी सर्विलांस की मदद से सुराग तलाशते हुए दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश पहुंची। महज 24 घंटे के अंदर पुलिस टीम ने शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी जिलों में करीब 1,000 किलोमीटर का सफर तय कर गिरोह के इन शातिरों को दबोच लिया।
ऐसे काम करता था ठगों का यह नेटवर्क जांच में खुलासा हुआ कि ठगी गई रकम को PayU पेमेंट गेटवे के जरिए आशीष कुमार के जन सेवा केंद्र (CSC) के डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर किया गया था। पूछताछ में सामने आया कि आशीष सिर्फ नाम का लाइसेंस धारक था, जबकि उसके सीएससी वॉलेट और बैंक खाते का इस्तेमाल अमित कुमार कर रहा था।
अमित कुमार जन सेवा केंद्र पर सिम पोर्ट कराने आने वाले ग्राहकों के पुराने सिम अपने पास रख लेता था और उन्हीं फर्जी नंबरों से वॉलेट चलाता था। इसके बाद वह 5% कमीशन के एवज में यह वॉलेट अपने साथी उमेश चंद को देता था। उमेश आगे राम दास नाम के एक अन्य शख्स से व्हाट्सएप के जरिए जुड़ा था, जो इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक था।
बरामदगी और आगे की कार्रवाई पुलिस ने आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। आरोपियों के खातों की जांच से अब तक 2.50 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इसके अलावा, देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 5 साइबर अपराधों के तार भी इसी गिरोह से जुड़े पाए गए हैं।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस बरामद किए गए डिजिटल उपकरणों का फोरेंसिक मुआयना करवा रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

