
नई दिल्ली : 09 सितंबर 2023: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित “पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (PGII)” और “इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकनोमिक कॉरिडोर” के बीच हुई समझौते के मौके पर एक महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया.
प्रधानमंत्री ने इस समयबद्ध ईवेंट का आयोजन करते हुए कहा, “इस स्पेशल event में आप सबका हार्दिक स्वागत है।” उन्होंने राष्ट्रपति जो बायडन के साथ इस ईवेंट को co-chair किया है और आज के समझौते को “एक और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक समझौता” कहा.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते का महत्व बताते हुए कहा, “आने वाले समय में यह भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच economic integration का प्रभावी माध्यम बनेगा, जो पूरे विश्व में कनेक्टिविटी और विकास को sustainable दिशा प्रदान करेगा.”
इस पार्टनरशिप के माध्यम से, भारत ने ग्लोबल साउथ के देशों में infrastructure gap को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देने का आलंब लिया है। प्रधानमंत्री ने इसके महत्व पर गुरुर्देव किया और कहा, “मज़बूत कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर मानव सभ्यता के विकास का मूल आधार हैं.”
भारत ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है और physical infrastructure के साथ social, डिजिटल, और financial infrastructure में भी अभूतपूर्व पैमाने पर निवेश किया है.
प्रधानमंत्री ने इसके अलावा भारत के अन्य देशों के साथ energy, railway, water, technology parks, और अन्य क्षेत्रों में infrastructure प्रोजेक्ट्स को भी implement किया है और उन्होंने इसमें demand-driven और transparent approach को महत्व दिया.
प्रधानमंत्री ने कनेक्टिविटी के महत्व को बताते हुए कहा, “कनेक्टिविटी विभिन्न देशों के बीच आपसी व्यापार ही नहीं, आपसी विश्वास भी बढ़ाने का स्रोत है।” उन्होंने इसे प्रमोट करने के लिए कुछ मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने की मांग की, जैसे अंतर्राष्ट्रीय norms, rules, और laws का पालन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, financial viability को बढ़ावा देना और पर्यावरण के मापदंडों का पालन करना.
प्रधानमंत्री ने समझौते को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखते हुए आने वाली पीढ़ियों के सपनों के विस्तार के बीज के रूप में बताया और सभी लीडर्स को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस महत्वपूर्ण प्रमुख आयोजन को संचालित किया।
यह समझौता ग्लोबल कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है और दुनिया भर के देशों के बीच और भी मजबूत और स्थायी संबंध बनाने का माध्यम प्रदान कर सकता है.


