

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने मानवता की एक अनोखी मिसाल कायम की है। अपनी ड्यूटी समाप्त करने के बाद, वह लापता हुए मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों, बुजुर्गों को खोजकर कर उनके परिवारों तक पहुंचाने के मिशन पर लगे हैं। मानवता का यह कार्य 2023 से निस्वार्थ भावना से करते आ रहे हैं ।
मानवता का अनोखा मिशन :
ASI अजय झा दिल्ली पुलिस की संचार इकाई (Communication Unit) हैदर पुर नॉर्थ वेस्ट दिल्ली में तैनात हैं । अजय झा रोज़ाना अपनी ड्यूटी समाप्त करने के बाद सड़कों पर लापता लोगों की खोज में निकलते हैं। उनके अथक प्रयासों के चलते, कई लापता लोग अपने घरों को लौट आए हैं।
इस अधिकारी का मानना है कि हर एक व्यक्ति का परिवार है और उनका जीवन बहुत महत्वपूर्ण है। वह कहते हैं, “जब मैं किसी लापता व्यक्ति को उनके परिवार से मिलाता हूँ, तो जो खुशी उनके चेहरे पर होती है, वह मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
ASI अजय झा का समर्पण :
ASI अजय झा उन लापता बच्चों, बुजुर्गों, और मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों के ढूंढने का कार्य वर्षों से कर रहे हैं जो अपने घरों से महीनों और वर्षों से लापता हो चुके हैं। जिनकी कोई खैर खबर परिवार वालों को भी नही है ।
इस अधिकारी ने Missing Children in Delhi के नाम से फेसबुक पेज बनाया हुआ है । दिल्ली पुलिस की Zipnet के अतिरिक्त कुछ लापता लोगों के लिए बने अन्य सोशल मीडिया के ग्रुपों से मदद लेते हैं । दिल्ली बाल कल्याण समिति (Child welfare Committee), अनाथ और वृद्ध आश्रमों से जुड़ कर उनसे भी सूचनाएं एकत्रित करते हैं ।

सोशल मीडिया और अन्य संसाधनों का उपयोग
व्हाट्स ऐप, इंसाग्राम, फेसबुक पर आई गुमशुदा लोगों की पोस्ट पर आई तस्वीरों को लेकर दिल्ली में बच्चों के लिए काम करने वाली एनजीओ, अनाथ आश्रम, वृद्ध आश्रमों में तस्वीर लेकर जाकर उनकी तलाश करते हैं । लापता का पता लगने पर उनके परिवारों का बड़ी मशक्कत से पता ढूंढकर उनसे संपर्क करते हैं ।
लापता लोगों की खोज :
अजय झा बताते हैं कि ” रोजान का रूटीन है कि ड्यूटी समाप्त करके में रोजाना रास्ते में लावारिश बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक रूप से विक्षिप्त पर नजर रखता हूं । यदि कोई मिलता है तो थाने ले जाकर उसकी सूचना लिखवाकर स्वयं उसके परिवार की जांच में जुट जाता हूं.”
सड़क दुर्घटनाओं में सहायता :
अजय ने बातचीत में यह भी बताया की सड़क दुर्घटना के मामलों में लोगों को अक्सर आंख बचाकर निकलते हुए देखा जा सकता है किंतु वो सड़क पर दुर्घटनाओं को लेकर भी सचेत रहते हैं । उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठता के दो किससे बयान किए । एक बार जब वह ड्यूटी समाप्त करके जा रहे थे तो राजघाट के पास आइसलैंड के एंबेसडर की गाड़ी का ड्राइवर एक साइकिल सवार का फेटल एक्सीडेंट करके भाग रहा था । उस कार का अपनी बाइक से पीछा कर उसे रोका और पुलिस के सुपुर्द कर दिया ।
एक अन्य घटना का जिक्र करते हुई बताया की 2022 में तिमारपुर इलाके में रात के 11:30 बजे एक ट्रक दो लोगों को टक्कर मार कर भाग रहा था । उन्होंने उस ट्रक का पीछा करके उसके ड्राइवर को पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया । इस हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर और दूसरे की अस्पताल में मौत हो गई थी ।
2023 से चल रहा है अभियान :
दिल्ली पुलिस के एएसआई अजय झा ने इस वर्ष के भीतर तकरीबन 30 लापता बच्चों और बुजुर्गों, जो मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं और जिनमें अधिकाश तो बोल, सुन और समझ नही पाते ऐसे लोगों को उनके अपनों से मिलवाने में कामयाबी हासिल की है ।
हाल ही में एक गूंगे और बहरे बच्चे को उसके माता पिता से मिलवाया । यह बच्चा तीन महीने से गुड़गांव से लापता था । एक बुजुर्ग महिला जो मानसिक रूप विक्षिप्त थी दिल्ली के अनजान रास्ते में भटक रही थी । उसको अपने संरक्षण में लेकर उसके बेटे तक पहुंचाया । इस तरह के कार्यों की इनकी लंबी फेहरिस्त है ।
दिल्ली पुलिस की छवि को निखारा :
एएसआई अजय झा ने दिल्ली पुलिस की छवि को भी निखारा है और लोगों के बीच विश्वास को मजबूत किया है। अधिकारी की यह मेहनत न केवल एक ऐसे इंसान की भूमिका को दर्शाती है जो समाज को इंसानियत का संदेश देने प्रयास कर रहा है ।
इस अधिकारी की इस कहानी ने साबित कर दिया है कि एक व्यक्ति की मेहनत और जज्बा किसी की जिंदगी में कितनी बड़ी खुशियाँ ला सकता है। मौके पर खड़े रहने वाले इस अधिकारी की प्रेरणा से सभी को सीखना चाहिए कि समाज में योगदान देने का हमेशा एक अवसर होता है


