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सिपाही ने बचाई महिला की जान , पेड़ों के बीच बनाना पड़ा क्लीनिक

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महिला का खुले आसमान के नीचे इलाज करते हुए डाक्टर तथा मदद करता हुआ सिपाही थान सिंह

उतरी दिल्ली : एक गाने के चन्द बोल याद आते हैं “तेरा साथ है मुझे क्या कमी है, अंधेरों में मिल रही रोशनी है ।’ इस गीत के बोल को दिल्ली की पुलिस कई बार चरितार्थ कर चुकी है । जब लोग हर तरफ से हताश हो जाते हैं तो अंत मे पुलिस के रूप में रोशनी की एक किरण दिखाई देती है ।
इस बार कोरोना के दूसरे संकटकालीन समय में दिल्ली पुलिस फिर संकटमोचन बन कर लोगों की मदद के लिए आगे आई है ।
आज दिल्ली के अस्पतालों में जो हालात पनप रहे हैं वह बेहद भयावह हैं । यदि आज के वक्त में कोई किसी भी प्रकार से रोगग्रस्त हो जाता है तो निश्चित तौर से सही इलाज की सुविधा मिलनी नामुमकिन है । पैसे वाले लोग तो किसी तरह इलाज करवा लेंगे किन्तु गरीब के लिए यह वक्त बेहद खराब है । ऐसे में या तो भगवान का या दिल्ली की पुलिस का एक मात्र सहारा है ।
आज दिल्ली पुलिस के एक सिपाही की सूझबूझ और दरियादिली से एक महिला की जान बच गई । दरअसल इस सिपाही का नाम थान सिंह है और यह दिल्ली के लाल किले पर तैनात है । लाल किले के पास पार्किंग में एक दम्पति पिछले 15 सालों से रहते आ रहे हैं । यह दोनों पति पत्नी पार्किंग में सफाई का काम करते हैं । यहीं इन्होंने अपने रहने की झोपड़ी बना रखी है । कल खातून (45) महिला की तबियत खराब हो गई । हालात यह थे कि उससे उठा भी नही जा रहा था ।  सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद छोड़ चुके महिला के पति के पास इतने पैसे भी नही थे अपनी पत्नी का किसी प्राइवेट क्लीनिंक में ले जाकर इलाज करवा सके ।
इस महिला के पति ने अपने हालातों की दास्तान जब थान सिंह को रो रो कर सुनाई तो इस सिपाही ने तुरंत अंगूरी बाग में क्लीनिक चला रहे एक डाक्टर से सम्पर्क किया । डाक्टर ने अपने क्लींनिक पर कोरोना के कारण रोगी को लाने से मना कर दिया किन्तु डाक्टर ने भी अपना फर्ज निभाते हुए थान सिंह के साथ महिला को चेक करने पहुंचा ।  इस महिला को झोपड़ी से निकाल कर पेड़ों के बीच लिटाया गया । वहीं इसके इलाज की व्यवस्था बनाने के लिए अस्थाई क्लीनिक बनाया गया । इसके बाद इस सिपाही को डॉक्टर ने मरीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सभी दवाई और सामान लिखवा दिया । थान सिंह ने बिना देर किए अपने खर्चे से दवाई और मेडिकल का सामान लाकर दे दिया ।

खुले आसमान के तले पेड़ों के नीचे खातून का इलाज शुरू कर दिया गया । पेड़ की टहनी के सहारे गलूकोज लटका दिया गया । इसके अतिरिक्त जो भी इलाज के लिए जरूरत पड़ती रही यह सिपाही लाता रहा ।

सिपाही थान सिंह (पुरानी फ़ोटो)

शाम तक इस सिपाही के प्रयासों के कारण महिला की स्थिति में सुधार आने लगा । अब खातून के स्वास्थ्य में पहले से काफी सुधार है ।  वक्त रहते इलाज हो जाने से खातून की जान बच गई । अब वह वापिस अपनी झोपड़ी में रह रही है । इस सिपाही ने गर्मी के चलते झोपड़ी में पंखा लगवा दिया है ।
नार्थ डिस्ट्रिक्ट डीसीपी एन्टो अल्फोंस का कहना है कि थान सिंह ने गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए लाल किले के सामने पेडों के बीच शिक्षा केन्द्र खोला हुआ है जिसका नाम ‘थान सिंह की पाठशाला’ रखा हुआ है । इसमें ड्यूटी के बाद आसपास के गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाता है । इस कार्य के लिए थान सिंह ने अखबारों औऱ समाचार चैनलों में काफी सुर्खियां बटोरी थी । इस तरह के कार्यों से दिल्ली पुलिस की गरिमा बढ़ती है । इस कार्य के लिए इस सिपाही को सम्मानित किया जाएगा ।
दिल्ली पुलिस में इस तरह के कार्य करने लोग निश्चित तौर से सम्मान और प्रशंसा के हकदार हैं ।

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