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19 मई : मौत के बाद दिल्ली पुलिस के सिपाहियों ने निभाया बेटों का फर्ज

 

नई दिल्ली : 12:57 AM : कौन कहता हैं कि पुलिस के सीने में इंसानियत का दिल नही धड़कता ? कौन कहता है कि खाकी में जज्बात नही होते ? हम आपको जिस खबर को बताने जा रहे हैं उसको सुनकर आपको आपके जहन में जो पुलिस की तस्वीरों के काले नेगिटिव हैं उनमें से मानवता की एक ऐसे तस्वीर उभरकर सामने आएगी जिसे देख कर आप ताज्जुब करेंगे ।

दिल्ली में कोरोना के ख़ौफ़ से एक बुज़ुर्ग महिला की मौत के बाद जब अर्थी को उठाने कोई नही था। दिल्ली पुलिस के सिपाहियों ने बेटा बनके कन्धा दिया और करवाया अंतिम संस्कार भी करवाया।

अर्थी को कंधा देने वाला सिपाही सुनील

कोरोना वायरस चलते पूरे देश मेंहै लॉकडाउन में सरकार, प्रशासन बढ़-चढ़कर लोगों की मदद कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस भी अपनी जान की परवाह किए बिना जरूरतमंदों की मदद कर रही है। दिल्ली पुलिस ने लोगों की मदद के लिए एक अभियान भी शुरू किया था।जिसका नाम दिया है-‘दिल्ली पुलिस, दिल की पुलिस। जो दिल से करे, देश का काम’। यही वजह दिल्ली पुलिस ने मानवता की मिशाल पेश की है ।

अर्थी को कंधा देने वाला सिपाही धर्मेंद्र

एक ऐसी ही एक तस्वीर राजधानी दिल्ली के जैतपुर थाने के अंतर्गत सामने आए जहां 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत के बाद जब उसको कंधा देने वाला कोई नहीं मिला तो थाने के 3 कॉन्स्टेबल ने उसकी अर्थी को कंधा दिया बल्कि अंतिम संस्कार भी करवाया।

अर्थी को कंधा देने वाला सिपाही राहुल

दरअसल 62 वर्षीय सुधा कश्यप दिल्ली में धर्मशाला रोड पर इनका मकान था काफी दिनों से बीमार चल रही थी अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हुई आसपास के पड़ोस से भी कोई नही आया।मौत के बाद जब कंधा देने के लिए इन्हें कोई नहीं मिला तो उन्होंने दिल्ली पुलिस से मदद मांगी जहां कॉन्स्टेबल राहुल कांस्टेबल सुनील रविकांत धर्मेंद्र इनके बेटे बनकर सामने आए और इनको कंधा भी दिया वह पूरा अंतिम संस्कार भी किया।

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