


नई दिल्ली : Delhi Police Special Cell : आतंकी मॉड्यूल पर निगरानी रखते हुए स्पेशल सेल को लगभग दो महीने पहले एक पाकिस्तानी नागरिक के स्लीपर सेल के बारे में एक विश्वसनीय जानकारी मिली थी, इसके बाद एसीएसपी ललित मोहन नेगी और हृदय भूषण, इंस्पेक्टर रविंदर कुमार त्यागी इंस्पेक्टर विनोद बडोला ने एक टीम बनाई । जिसमें सब इंस्पेक्टर सुंदर गौतम, सब इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार त्यागी की देखरेख में इस जानकारी जुटाने का काम शुरू किया गया ।
इस सूचना पर गुप्त निगरानी रखी गई और सूत्रों को सक्रिय किया गया। सेल की टीम को इनपुट मिले कि एक पाकिस्तानी नागरिक को भारत में आतंकी हमले करने के लिए निर्देशित किया गया है और वह हथियार और विस्फोटक हासिल कर लिए हैं और अपने आतंकी मकसद को अंजाम देने की तैयारी कर चुका है । इस आतंकवाद की पहचान मोहम्मद अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी के रूप में हुई । और यह भी पता चला कि वह स्लीपर सेल की कड़ी का सक्रिय सदस्य है । इसने पिछले कई वर्षों में भारत में कई आतंकी हमले और जासूसी गतिविधियों को अंजाम दिया है। इसके अलावा, सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई थी कि इस पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद असरफ उर्फ अली अहमद नूर को भारत में आतंकवादी हमले करने के लिए निर्देशित किया गया है और इसके लिए, वह हथियार/विस्फोटक और अन्य तैयारियों को कर चुका है । यह भारत में पीर मौलाना बन कर दिल्ली में रह रहा था ।
11 अक्टूबर को महत्वपूर्ण सूचना मिली थी कि मोहम्मद अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में रह रहा है । लक्ष्मी नगर क्षेत्र में स्पेशल सेल की टीम को तैनात किया गया । लगातार निगरानी करने के परिणामस्वरूप पाक नागरिक मोहम्मद अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी की पहचान कर टीम ने बिना वक्त गवाएं कार्रवाई करते हुए मोहम्मद अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी को पकड़ लिया। इससे पूछताछ के बाद यमुनापार और आसपास के इलाकों में तुरंत छापेमारी की गई । इस कार्यवाही से एक एके-47 राइफल,एक हथगोला, 60 राउंड के साथ एके-47 की दो मैगजीन, दो अत्याधुनिक पिस्तौल, चीन ने बनाई 50 राउंड के साथ, जाली दस्तावेज प्राप्त एक भारतीय पासपोर्ट और अन्य भारतीय आईडी मिली ।
सेल द्वारा पूछताछ में पता चला है कि गिरफ्तार व्यक्ति की वास्तविक पहचान मोहम्मद अशरफ पुत्र उमरदीन निवासी गांव कोटली, पोस्ट ऑफिस चंद्रके कंजरूर, नरोवल, पंजाब, पाकिस्तान है। वह भारत में स्लीपर सेल के प्रमुख के रूप में काम कर रहा था और उसे पाक ISI के इशारे पर त्यौहार के अवसर पर काम करने के लिए सौंपा गया था। मोहम्मद अशरफ अली अहमद नूरी पुत्र नूर अहमद, निवासी शास्त्री पार्क, दिल्ली की नकली पहचान का उपयोग करके भारत में रह रहा था।

स्पेशल सेल के एडीशनल कमिश्नर प्रमोद कुशवाह ने बताया कि 2004 में, इसने पाकिस्तान के सियालकोट में एक पाक आईएसआई हैंडलर कोड नाम नासिर से ट्रेनिंग ली । नासिर ने उसे भारत में पाकिस्तान के लिए स्लीपर सेल के रूप में काम करने के लिए भेजा गया । 2004 में, अपनी ट्रेनिंग पूरा करने के बाद, मोहम्मद अशरफ सिलीगुड़ी सीमा, पश्चिम बंगाल के रास्ते से भारत में प्रवेश करने में कामयाब हो गया। भारत में प्रवेश करने के बाद, वह अजमेर गया और एक स्थानीय मस्जिद, अजमेर में एक मौलवी से मित्रता की। वर्ष 2006 में वह उस मौलवी के साथ दिल्ली गया था। यह शहर में एक मौलवी के एक रिश्तेदार के कारखाने में आया और उस इलाके के कारखानों में दैनिक मजदूरी के रूप में काम करना शुरू कर दिया । यह मौलवी के अन्य रिश्तेदारों से मिला और उनका विश्वास जीतने में कामयाब रहा और मौलवी के रिश्तेदार की आईडी के माध्यम से वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर द्वारा अपने आईएसआई हैंडलर नासिर से पैसे प्राप्त करना शुरू कर दिए । भारत में रहने के दौरान वह विभिन्न सुरक्षित संचार चैनलों के माध्यम से अपने पाकिस्तानी हैंडलर नासिर के साथ नियमित संपर्क में था। हाल ही में उसके पाकिस्तानी हैंडलर ने त्योहारों के मौसम में आतंकी हमलों को अंजाम देने का काम सौंपा था । इसके पास से बरामद हथियारों और गोला-बारूद को इसी मकसद से लाया था । इस पर जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में कई आतंकी हमलों में शामिल होने का संदेह है। मामले की आगे की जांच जारी है।



