
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने दी एक युवक को नई जिंदगी की सौगात। पुलिस ने किया ऐसा काम जो शायद आज स्वार्थी हो चुकी इंसानियत भी नहीं कर सकती। दिल्ली पुलिस के एक एएसआइ ने पुलिस ड्यूटी की सार्थकता का समाज और पुलिस विभाग में एक बेमिसाल उदहारण पेश किया है।

अजय के मददगार एएसआई सतीश मलिक
नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में तैनात एएसआइ सतीश मालिक ने मानवता के नाते एक ऐसे युवक की मदद की जो जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। दरअसल उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले अजय कुमार की दोनों किडनियां ख़राब हो गई थी। प्रदेश के डाक्टरों ने दिल्ली जाकर इलाज करवाने की सलाह दी। अजय इलाज के लिए डेढ़ साल पहले दिल्ली आ गया। अजय का इलाज राम मनोहर लोहिया अस्पताल में शुरू हो गया। अस्पताल के डॉक्टर्स ने अजय को बता दिया जल्दी उसे किडनी का इंतजाम करना पड़ेगा वरना उसकी जिंदगी बचना मुश्किल है। अजय की जिंदगी बचाने के लिए अजय की पत्नी की माँ गीता अपनी किडनी देने के लिए राजी हो गई।
अजय का इलाज दिल्ली में होना था और इसके लिए दिल्ली में अस्पताल के आसपास रहना जरूरी था जिससे की यदि कोई एमरजेंसी हो तो तुरंत अस्पताल में पहुँचा जा सके । इसके लिए ख़ास तरह के टेस्ट से होने थे तथा हर सप्ताह डायलेसिस किया जाना था । यह सब दिल्ली में रहकर ही संभव था। बार बार रामपुर से आना अजय और उसकी सास के लिए असंभव था। अजय का साधारण परिवार से सम्बन्ध रखता है। अजय निजी कम्पनी में ऍम आर का काम करता है। परिवार में दो बेटियां है। इतना पैसा भी नहीं है की वो दिल्ली में एक साल तक के लिए कहीं ठहर सकें।
अजय जब हताश हो गया तो मंदिर मार्ग थाने मैं तैनात एएसआई सतीश मलिक से अजय की मुलाकात बिड़ला मंदिर में हुई। सतीश मालिक उस वक्त उसी बीट में तैनात थे। सतीश मालिक ने अजय की बात सुनी। इस अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी पर बिड़ला मंदिर की धर्मशाला में अजय के ठहरने का इंतजाम करवा दिया। मगर धर्मशाला के नियमानुसार लम्बे समय तक किसी को धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था नहीं है। सतीश मलिक ने अपने SHO इंस्पेक्टर विक्रमजीत सिंह को अजय की बीमारी और आ रही समस्या का जिक्र किया

ऑपरेशन से पहले अजय के साथ मंदिर मार्ग थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर विक्रमजीत सिंह
थाना इंचार्ज विक्रमजीत सिंह और सतीश मलिक ने बिड़ला मंदिर धर्मशाला समिति से गुहार लगाई किन्तु उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद सतीश मलिक मंदिर मार्ग इलाके में हिन्दू महासभा समिति से मिले उन्होंने अजय के सारे हालत बताये। हिन्दू महासभा समिति ने सतीश मलिक की गुहार सुनकर अजय को धर्मशाला में ठहरने की इजाजत दे दी। पुलिस के प्रयास से अजय को अस्पताल के पास धर्मशाला मिलने से जैसे आधी जिंदगी मिल गई।
थाना पास में होने से थाना इंचार्च और एएसआई अजय का ध्यान रखने लगे। किसी बात की तकलीफ न हो इसके लिए सतीश मलिक रोजाना उसकी खेर खबर लेते रहे यहां तक की धर्मशाला का किराया और खाने पीने में भी मदद करते थे।अजय के ऑपरेशन से पहले खून की जरूरत पड़ी तो थाना इंचार्ज विक्रमजीत सिंह ने पुलिस के जवान तैयार कर लिए मगर परिवार वालों के खून देने के बाद और खून की जरूरत नहीं पड़ी।
तक़रीबन डेढ़ साल बाद कल यानि 24 जुलाई को अजय और उसकी सास गीता देवी का 10 घंटे ऑपरेशन चला। गीता देवी की किडनी का सफलता पूर्वक प्रत्यारोपण अजय को कर दिया गया। दोनों के आपरेशन सफल रहे। इस तरह दो अधिकारीयों ने मानवता की मिसाल कायम की है।
परिवार के लोग इस सफलता श्रेय सबसे पहले दिल्ली पुलिस के इन दो अधिकारीयों को दे रहे हैं जिनकी व्यवस्था के कारण दिल्ली में रहकर इलाज सम्भव हो पाया और अजय को नई जिंदगी मिली है। अजय के इस सफल ऑपरेशन की खबर सुनकर दोनों अधिकारी भी खुश है उनका कहना है की उनका प्रयास सफल हुआ हमने पुलिस के फर्ज के साथ साथ इन्सानित का फ़र्ज़ निभाया।

अजय IPL के दौरान दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला में
गौरतलब बात यह है की दिल्ली पुलिस के जव्वाइंट कमिश्नर देवेश श्रीवास्तव ने दिल्ली में IPL मैच के दौरान अजय की ऑपरेशन से पहले इच्छा पूरी की थी। इन अधिकारी ने अजय के लिए IPL मैच के टिकट भी भिजवाए थे। इस तरह दिल्ली पुलिस ने फरिश्ता बन कर अजय को नई जिंदगी दी।



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