नई दिल्ली, 25 जून 2025 : दिल्ली के चांदनी महल इलाके में 18 जून 2025 को एक दंपति की 4 साल की बच्ची अचानक लापता हो गई थी, जब उसकी मां पानी भरने में व्यस्त थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। इलाके के 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पता चला कि बच्ची को एक महिला बहला-फुसलाकर दिल्ली गेट के पास संचार भवन की ओर ले गई थी।
जांच में सामने आया कि आरोपी महिला, बरखा (40), बच्ची को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अपने गांव ले गई थी। पुलिस को सूचना मिली कि बरखा बच्ची को भीख मंगवाने और आगे चलकर मानव तस्करी के इरादे से ले गई थी। पुलिस की मुस्तैदी और यूपी पुलिस के साथ समन्वय से महिला की गतिविधियों पर नजर रखी गई। जैसे ही बरखा बच्ची को लेकर दिल्ली लौटी, पुलिस ने सादे कपड़ों में नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जाल बिछाया। 21 जून की सुबह बरखा को बच्ची के साथ शांति वन रेड लाइट के पास धर दबोचा गया और मासूम को सकुशल बरामद कर लिया गया।
पूछताछ में बरखा ने कबूला कि उसने बच्ची को भीख मंगवाने और बाद में बेचने की नीयत से अगवा किया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या वह किसी संगठित गिरोह से जुड़ी है।
पुलिस की सतर्कता और सीसीटीवी विश्लेषण ने कैसे अपहरणकर्ता का पर्दाफाश किया
पुलिस की सतर्कता और सीसीटीवी विश्लेषण ने अपहरणकर्ता का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई। जैसे ही बच्ची के लापता होने की सूचना मिली, पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज में बच्ची को एक महिला के साथ जाते हुए देखा गया, जिससे पुलिस को अहम सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध महिला की पहचान और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी।
सीसीटीवी के आधार पर पुलिस ने महिला की संभावित लोकेशन का पता लगाया और रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर सादा कपड़ों में टीम तैनात कर दी। आखिरकार, महिला बच्ची के साथ स्टेशन पर दिखाई दी और पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, सतर्कता और तकनीकी संसाधनों (सीसीटीवी फुटेज) के कुशल उपयोग ने अपहरणकर्ता की पहचान और गिरफ्तारी में निर्णायक भूमिका निभाई
बच्चों से भीख मंगवाने का एंगल
इस मामले ने एक बार फिर बच्चों से भीख मंगवाने और मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों की गंभीरता को उजागर किया है। आरोपी महिला ने मासूम बच्ची को भीख मंगवाने के लिए इस्तेमाल करने और बाद में बेचने की योजना बनाई थी, जो समाज के लिए बेहद चिंताजनक है।
महिला भिखारन द्वारा बच्चों के साथ भीख मंगवाने का तरीका बच्चों की तस्करी में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। यह एक संगठित अपराध का हिस्सा है, जिसमें बच्चों को अपहरण या खरीद-फरोख्त करके जबरन भीख मंगवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों को भीख मंगवाने के लिए मजबूर करना या उनके शरीर को क्षतिग्रस्त करना, तस्करी के उद्देश्य से किया जाता है ।
कई बार महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में लेकर ट्रैफिक सिग्नलों या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भीख मांगती हैं, जिससे लोगों की सहानुभूति मिलती है और ज्यादा पैसे मिलते हैं। कई मामलों में ये बच्चे उनके अपने नहीं होते, बल्कि तस्करी के जरिए लाए गए होते हैं या माफियाओं द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं।
भारत में हर साल हजारों बच्चों का अपहरण इसी मकसद से किया जाता है कि उन्हें भीख मंगवाने के धंधे में लगाया जा सके। यह एक लाभदायक अवैध व्यवसाय बन चुका है, जिसमें दलाल और माफिया शामिल रहते हैं। बच्चों से भीख मंगवाना मानव तस्करी का एक बड़ा और गंभीर पहलू है, जिसकी पुष्टि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी की गई है ।
पुलिस की प्रशंसा
दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई, सतर्कता, सीसीटीवी विश्लेषण और यूपी पुलिस के साथ बेहतर समन्वय की जितनी सराहना की जाए कम है। पुलिस की मुस्तैदी और प्रोफेशनलिज्म के चलते एक मासूम बच्ची को समय रहते बचाया जा सका और एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ। इस ऑपरेशन ने दिखा दिया कि यदि पुलिस और प्रशासन सतर्क रहे तो बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोका जा सकता है


