
नई दिल्ली : ऑन लाइन ठगी के मामलों की जैसे बाढ़ आ गई हो। अब ऑन लाइन ठगी के शिकार हुए लोगों की तायदाद बढ़ती जा रही है। दिल्ली पुलिस की साईबर सेल और जिलों में बनी साईबर यूनिट बहुत से ऑन लाइन ठगी करने वालों को जेल भेज चुकी है मगर फिर भी लोगों को बार बार सतर्क करने के बाद भी लोग इनके जाल में फंस ही जाते हैं।
इस बार इनके जाल में भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी CBI में तैनात एक सिपाही देवराज आ गए जो CISF से CBI में डेपुटेशन पर आये है।
देवराज को किसी ऑन लाइन पर ठगी करने वालों ने उनके क्रडिट कार्ड पर मिले पॉइंट पर गिफ्ट देने की पेशकश की और देवराज उनकी ठगी का शिकार होकर उनको अपनी रकम दे बैठे।
6 सितंबर को CBI में तैनात सिपाही देवराज ने लोधी कॉलोनी थाने में एक अपने साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई थी । उनके पास टेलीकॉलर ने कॉल की उनके क्रेडिट में आये इनाम के पॉइंट पर उपहार देने की बात की इसकी ऐवज में 8970 रूपये की राशि जमा करवाने को कहा गया। देवराज ने 8970 रूपये की राशि का भुगतान कर दिया मगर उनका उपहार नही आया । बाद जब उपहार नहीं आया तो देवराज ने कई बार फोन मिलाया मगर किसी ने फ़ोन नहीं उठाया और बाद में उनका नंबर ब्लाक कर दिया गया।
मामला CBI के सिपाही के साथ ठगी का था इसलिए इस बात को ध्यान में रखकर ACP कुलबीर सिंह और थाना इंचार्ज सुनील ढाका ने इस मामले के आरोपियों तक पहुंचने के लिए अपने थाने के साइबर फ्रॉड पर काम करने वालों की बनाई जिसमे सब इंस्पेक्टर दीपेंदर, सब इंस्पेक्टर अचल , आईएसआई ईश्वर चंद, आईएसआई विजय, सिपाही अनूप को शामिल किया गया।

थाना इंचार्ज सुनील ढाका को साथ इस मामले की पड़ताल की जांच के पहले चरण में पता चला की देवराज की रकम किसी व्यक्ति के PAYTM में भेजी गई है। इसके बाद PAYTM वाइलेट से एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है। वह खाता M/S FASHION PRAVITTI के नाम से है इस खाते का मालिक आशीष है और यह पैसा आशीष के खाते में आया था । आगे की जांच के दौरान मनीष नाम का युवक हिरासत में लिया गया । मनीष से पता चल की वह कई खातों का संचालन अपनी देख रेख में करता है । उन खातों को 20 % कमीशन पर किराये पर लिये हुए थे ।
मनीष की गिरफ्तारी के बाद उसने खुलासा किया की अभिषेक भी इस चीटिंग गैंग का सहयोगी है और वह भी अपने खाते का इस्तेमाल 20% कमीशन के लिए करवाता था।

इस सारे ऑन लाइन फ़्रॉड का लीडर मनीष है जो पहले किसी कॉल सेंटर में काम किया करता था, वहीं से उसे टेली कालर के जरिये लोगों को ठगने का गुर सीखा। 2017 में हरिओम, रमन और गुरुचरण के सम्पर्क में आया और वेबसाइट डिजाइनिंग के बिजनेस में लग गया। हरिओम, रमन, गुरुचरण के पास क्रेडिट कार्ड के मौजूदा ग्राहकों का डेटा था जो मनीष को दे दिया था, उसी डेटा का इस्तेमाल कर उसने ऑन लाईन चीटिंग करने का धंधा शुरू कर दिया। इन्होने अपने अपने नामों से तकरीबन नौ अलग अलग बैंकों में अपने खाते खोले। इसके बाद 2017 से इन्होने ऑनलाइन चिंटिंग का काम शुरू कर दिया।
टेली-कॉलिंग के लिए उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले सिम कार्ड का उपयोग फर्जी नामों और दस्तावेजों में जारी किया जाता था, ताकि, उपयोगकर्ताओं के नाम और पते के आधार पर उनकी पहचान न की जा सके।

आशीष एक कपड़े की दुकान में काम करना शुरू किया। बाद में उन्होंने अपने खाते को कमीशन लेकर ठगी की रकम ट्रांसफर के लिए मनीष के संरक्षण में दे दिया ।
अभिषेक ICICI बैंक के लिए क्रेडिट कार्ड एजेंट के रूप में काम करता था । जहाँ उसने क्रेडिट कार्ड के बारे में जानकारी हासिल कर ली थी उसके बाद उसने अमेज़न में डिलीवरी बॉय के रूप में काम किया। अब वह दिल्ली सिविल डिफेंस में तैनात हैं।

पुलिस को इनके खातों से लोगों से ठगी गई 6 लाख रुपये की रकम जब्त कर ली गई है । इनसे 5 मोबाइल फोन मिले हैं जिससे ठगी किया करते थे । दो वायरलेस टेलीफोन टेलीकालिंग के लिये किया करते थे । 4 लेपटॉप बरामद हुए जिसमें ग्राहकों का देता फीड है । 8 बैंकों के खाते मिले हैं जिसमें धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करवाते थे । 12 फ़र्ज़ी नामों की सिम मिली है जिनका इस्तेमाल यह टेलीकालिंग के लिए किया करते थे ।
इस गैंग के तीन सदस्य हरिओम, रमन, गुरु चरण फरार हैं, उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस का प्रयास जारी हैं।



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