नई दिल्ली : देश के कई राज्यों में दो समुदायों के बीच हिंसक घटनाएं हो रही हैं । मध्य प्रदेश के करौली से लेकर राजस्थान जोधपुर तक जमकर सांप्रदायिक विवाद हुआ । इसी प्रकार एक साप्रदायिकता की चिंगारी दिल्ली में आग बनते बनते रह गई ।
पहली घटना मंगलवार की रात सेंट्रल दिल्ली के हौज काजी इलाके की है । ईद की रात नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के जाफराबाद इलाके से कुछ लड़के दुपहिया वाहनों पर सवार मध्य जिले के हौजकाजी धोबी कटरे की गली से निकल रहे थे । यह लड़के तंग गली में तेज रफ्तार से वाहनों को दौड़ा रहे थे । तेज रफ्तार के चलते के वाहन की टक्कर लगने से वहां के स्थानीय लोगों से इनकी झड़प ओर हाथापाई हो गई । इसके बाद अफवाह हिंदू मुस्लिम झगड़े की फैलाई जाने लगी ।
इस अफवाह के बाद इलाके में तनाव फैल गया और लोग सड़कों पर भीड़ की शक्ल में इकठ्ठे होने लगे । इस झगड़े की सूचना मिलते ही मध्य जिले की डीसीपी श्वेता चौहान ने अपनी सूझबूझ और त्वरित कार्यवाही करते हुए सांप्रदायिक माहौल के बिगड़ने से पहले लगाम कस दी ।
इस महिला डीसीपी ने इलाके को थोड़ी ही देर में सुरक्षा बलों के साथ छावनी में तब्दील कर दंगाइयों के हौसले पस्त कर दिए । जिले मे अलग अलग समुदायों को एकत्रित करके बनी अमन कमेटी के सामाजिक और धार्मिक हिंदू मुस्लिम कार्यकर्ताओं को बुलाकर वास्तविक घटना की जानकारी देकर शांति कायम की ।
उल्लेखनीय बात यह भी है की 30 जून 2019 में इसी लाल कुंआ, हौजकाजी इलाके में दुर्गा मंदिर वाली गली में मूर्ति तोड़ने की घटना पर सांप्रदायिक माहौल तकरीबन 9 जुलाई तक तनावपूर्ण रहा । उस वक्त 3000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती में मंदिर की मूर्तियों की पुनः प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई थी । यह मामला भी उस वक्त भी एक पार्किंग को लेकर विवाद था जिसे हिंदू मुस्लिम बना दिया गया । दोनों समुदायों के आपसी तालमेल और बातचीत से इसे भी शांत कर दिया गया था ।
दूसरी घटना उत्तर पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके की है । यहां बीच सड़क के आमने सामने दो अलग अलग समुदायों के घर हैं । बुधवार की रात अचानक आमने सामने से पथराव होने लगा । यहां भी हिंदू मुस्लिम झगड़े की अफवाहों को फैलाया जाने लगा । जहां यह पथराव हो रहा था उसके ठीक पीछे पुलिस स्टेशन वेलकम है । थाने में तैनात स्टाफ ने बिना वक्त गवाएं मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया । यह झगड़ा X और Y ब्लॉक के बच्चों के बीच हुआ था जिसपर बच्चों की तरफ से आए दोनों तरफ के लोगों में बहसबाजी, मारपीट फिर पत्थरबाजी शुरू हो गई ।
यहां भी इस जिले के डीसीपी संजय सैन द्वारा चलाया गया शान्ति मिशन `उम्मीद‘ काम आया । इस मिशन के दायरे में इलाके की नागरिक भाई चारा समिति के सदस्यों के एक साथ मिलकर दोनों समुदायों के लोगों को समझाकर झगड़े को शांत किया गया ।
जो लोग बच्चों के आपसी झगड़े के बीच इसको हिंदू मुस्लिम फसाद का रंग देने के चलते हिंसा करने पर उतारू थे उनमें से पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है और तकरीबन 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है ।
इस जिले में एक बात यह गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली का यह इलाका 2020 में CAA OR NRC प्रदर्शन के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों की हिंसा को झेल चुका है । उन दंगों में तकरीबन 53 लोगों की जाने गई थी । इसलिए यहां सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने का खतरा अक्सर बना रहता है ।
इस प्रकार दिल्ली के दो जिलों के उपायुक्तों ने दिल्ली के दो जिलों को हिंदू मुस्लिम विवाद होने से बचा लिया । खासकर उत्तर पूर्वी जिले में चलाया जा रहा ‘उम्मीद’ शांति मिशन इस उपद्रव में बेहद कारगर साबित हुआ ।


