

नई दिल्ली : सेंट्रल दिल्ली में एक 40 दिन की नवजात बच्ची के अपहरण की नाटकीय घटना ने सबको अचरज में डाल दिया. इस कहानी से यह बात उभर कर सामने आई है कि आज भी इस आधुनिक सोच रखने वाले शिक्षित समाज में कुछ लोग लड़की पैदा होने की कुंठा से ग्रस्त हैं । पुत्र प्राप्ति की कामना के चलते बच्चियों की बलि देने में उनको कोई गुरेज नही है.
बुधवार की शाम 5:30 पर पुलिस को पीसीआर पर सूचना मिली की देशबंधु गुप्ता थाना इलाके झंडेवालान मंदिर के पास सरेआम सड़क से एक मां की गोद से उसकी एक माह की बच्ची को दो बाइक सवार बदमाश अपहरण कर फरार हो गए. बताया यह गया कि जब महिला झंडेवाले मंदिर से दर्शन करके ऑटो में बैठ रही थी उसी वक्त बाइक सवार दो लोगों ने बच्ची का अपहरण कर लिया.
यह जिस जगह से अपहरण किया गया वहां पहाड़ गंज और देशबंधु गुप्ता रोड थानों की सीमाएं लगती है. PCR कॉल मिलने से दोनों थानों में अफरातफरी मच गई.
मुख्य बात यह भी थी कि यह बच्ची दिल्ली बीजेपी के युवा मोर्चा और वाल्मीकि समाज के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वासु रुखड़ की बेटी है. इसलिए पुलिस पर एक राजनैतिक दवाब भी आने लगा था.
कुछ ही घंटों बाद पुलिस के लिए एक राहत भरी सूचना आई. नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के मौरिस नगर थाना एरिया में दौलत राम कालेज के पीछे और स्पेशल स्टाफ नॉर्थ के सामने शनि मंदिर के बाहर देहली पर बच्ची को देखकर लोगों ने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंचकर पुलिस ने बच्ची को सकुशल चिकित्सा जांच के बाद परिवार को सौंप दिया.
सेंट्रल दिल्ली की स्पेशल स्टाफ की गहन जांच के बाद पुलिस ने 8 घंटे के भीतर 40 दिन की बच्ची के अपहरण की झूठी कहानी से पर्दा उठा दिया. दरअसल बच्ची की मां ने अपनी फूल सी मासूम बच्ची के अपहरण की कहानी रची थी. इसके पीछे कारण ऐसा था जिसको सुनकर इंसानियत की गर्दन शर्म से झुक जाए. आज जहां देश में बेटियां बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. देश की बेटियां आसमान की बुलंदी को छू रही हैं वहीं समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बेटियो को हीन समझते हैं.
नॉर्थ दिल्ली के मलका गंज की रहने वाली एक महिला ने अपनी 40 दिन की दुधमुही बच्ची को सिर्फ इस कारण से मंदिर की देहली पर छोड़ दिया क्योंकि तीसरी संतान ने लड़की के रूप में जन्म लिया है. इस महिला की पहले भी दो बेटियां है अब इस बार भी तीसरी बेटी के जन्म लेने के कारण खुद हीनभावना से ग्रसित हो गई और उसने मां होते हुए ऐसा फैसला ले लिया जिसको सुनकर हर मां का कलेजा रो उठेगा. उसने अपनी तीसरी नवजात बेटी का त्याग करने का फैसला कर लिया.
उसने पहले अपनी मासूम बेटी को झंडेवाले मंदिर में माता के दर्शन किए और अपनी बेटी की रक्षा करने की प्रार्थना की ओर इसके बाद उसे उत्तरी दिल्ली के मोरिस नगर, शनि मंदिर की देहली पर रख कर. झंडेवाले मंदिर पर आकर बच्ची के अपहरण की मनघड़ंत कहानी रची.
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी श्वेता चौहान ने अपने जिले की कई जांच टीमें बनाकर चौतरफा रवाना कर दिया था. डीसीपी शाम पांच बजे से लेकर आधी रात तक इस मामले की तहकीकात में जुटी रही. ज्वाइंट सीपी भी लगातार इस मामले में नजर बनाए हुए थे. डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ इंस्पेक्टर शैलेंद्र शर्मा की टीम ने सेंट्रल दिल्ली से लेकर नॉर्थ दिल्ली के उन सभी रास्तों में लगे सैंकडों की संख्या में सीसीटीवी कैमरों को खंगाल डाला जो रास्ते मौरिस नगर के उस मंदिर तक जाते थे जहां से बच्ची मिली थी. स्टाफ की टीम को इन्हीं सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से कहानी के राज मिल गए. इस प्रकार स्पेशल स्टाफ की टीम ने 8 घंटे की मशक्कत के बाद अपहरण की फर्जी कहानी की सच्चाई सामने ला दी.



