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21 मार्च :  आजीवन कारावास का फरार दोषी सात वर्षों के बाद किया गया गिरफ्तार

रमजान के महीने में रोजाना आता था मस्जिद में नमाज पढ़ने, मस्जिद से किया गया गिरफ्तार

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पुलिस टीम के कब्जे में आजीवन कारावास का भगौड़ा दोषी असलम

नई दिल्ली : सेंट्रल दिल्ली पहाड़गंज पुलिस स्टेशन की टीम ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने के बाद से फरार था। आरोपी, सात वर्षों तक पुलिस की नजरों से बचता रहा और अब कानून के शिकंजे में है।

पुलिस टीम ने तकनीकी और मैनुअल निगरानी के जरिए और स्थानीय मुखबिरों की मदद से 7 वर्षों से फरार आरोपी को ढूंढ निकाला। रमजान के महीने में नमाज अदा करने के दौरान आरोपी को चांदनी चौक के उंची मस्जिद से गिरफ्तार किया गया।

महिला को जलाने का दोषी 

दिनांक 16-10-2010 को एक महिला आरती पत्नी जावेद निवासी गलीहमीम नईम बेग वली, काला महल, दिल्ली को जलती हुई हालत में एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीड़िता आरती ने कहा कि उसे उसके पति के चाचा असलम और उसके बच्चों सम्मी और अशरफ ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। इस संबंध में चांदनी महल पुलिस स्टेशन की धारा 307 के तहत एफआईआर नंबर 95/2010 दर्ज की गई थी। 18-10-2010 को आरती की जलाए जाने के कारण मृत्यु हो गई और बाद में इसके बाद आरोपी असलम को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद आरोपी असलम के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई। अन्य आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया गया और उसके बाद शेष दोनों आरोपियों अशरफ और सम्मी को गिरफ्तार कर लिया गया।

दिल्ली की कोर्ट ने दी सजा

सेंट्रल दिल्ली डीसीपी हर्षवर्धन ने जानकारी देते हुए बताया की 09.10.2012 को कावेरी बावेजा, एएसजे, टीएचसी, दिल्ली की माननीय अदालत ने आरोपी सम्मी निवासी गली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद अभियुक्त सम्मी को दिनांक 16.03.2017 को जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद से आज तक आरोपी सम्मी ने कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ था ।

पहाड़ गंज पुलिस द्वारा पैरोल जम्पर्स की खोज

पहाड़ गंज पुलिस स्टेशन की एक टीम ने, इंस्पेक्टर राजीव राणा की निगरानी में, पैरोल पर रिहा किए गए कैदियों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस टीम में एसआई मुकेश तोमर, पीएसआई विकास कसाना, एएसआई इफ्तिखार, हवलदार मनोज, सिपाही मनीष और प्रिंस शामिल हैं, जिन्होंने  संजय सिंह, एसीपी पहाड़ गंज के  निर्देशन में इस ऑपरेशन के लिए काम किया।

टीम की सफलता

इस टीम ने न केवल पैरोल जम्पर्स का पता लगाया है, बल्कि समाज की सुरक्षा के लिए उन्हें पुनः हिरासत में लेने का काम भी किया है। इस प्रक्रिया में उन्होंने कर्तव्य और समर्पण का परिचय दिया है।

इस खबर को सामाजिक दृष्टि से देखते हुए, यह टीम समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी और समर्पण का उदाहरण पेश करती है। उनके इस कार्य से नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होती है और अपराधियों में भय उत्पन्न होता है।

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