नई दिल्ली : दक्षिणी जिला : दिल्ली की गलियों में एक बार फिर आग की लपटों ने अपना तांडव मचाया। चांदनी चौक के मारवाड़ी कटरा में लगी आग की गर्मी अभी शांत भी नहीं हुई थी कि मालवीय नगर की एक इमारत की तीसरी मंजिल पर आग ने अपना घर बना लिया। एक एयरकंडीशन यंत्र से उठी चिंगारी ने पूरे घर को अपनी आगोश में ले लिया।
दोपहर के उस भीषण घड़ी में, जब सूचना मिली कि M ब्लॉक में आग लगी है, दिल्ली पुलिस की पीसीआर ईगल 24 ने तुरंत कार्रवाई की। सात मिनट के भीतर, वे घटनास्थल पर पहुंच गए। एएसआई धर्मवीर, हवलदार कपिल राठी, और बीट हवलदार नरेंद्र ने बिना किसी देरी के जान बचाने का बीड़ा उठाया।
वे तीनों जांबाज साइड के मकान की छत पर पहुंचे, जहां लोहे का जाल उनके साहसिक प्रयासों को चुनौती दे रहा था। लेकिन हवलदार कपिल राठी ने हार नहीं मानी। उन्होंने पड़ोसी मकान में पहुंचकर हथौड़ा मंगवाया और दीवार को तोड़ दिया। इस बहादुरी भरे कदम से दो बच्चों और एक 23 वर्षीय युवक को आग से बचा लिया गया।
दमकल की टीम के आने से पहले ही, इन तीनों पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर तीन जिंदगियां बचा लीं। इस दौरान, आशीष माथुर, जो उन बच्चों के पिता थे, इमारत की छत पर चढ़कर अपने बच्चों की सलामती की दुआएं मांग रहे थे।
दिल्ली पुलिस के स्टाफ ने वीरता का प्रदर्शन किया, बल्कि उन्होंने साहस और समर्पण की एक नई मिसाल भी कायम की। इस घटना ने समाज में पुलिस के प्रति सम्मान और आदर की भावना को और भी मजबूत किया है । आशीष माथुर और उनके परिवार के लिए, ये पुलिसकर्मी नायक से कम नहीं हैं।
इस घटना के बाद, दिल्ली पुलिस पीसीआर और लोकल थाने के हवलदार की बहादुरी की चर्चा हर जगह हो रही है। उनकी तत्परता और निस्वार्थ सेवा ने न केवल तीन जिंदगियों को बचाया, बल्कि यह भी दिखाया कि मानवता अभी भी जीवित है। इस तरह की घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि वीरता और साहस की कहानियां केवल पुराणों में ही नहीं, बल्कि हमारे आस-पास भी मौजूद हैं।
आज के इस युग में, जहां अक्सर नकारात्मकता और अपराध की खबरें हमें घेरे रहती हैं, ऐसी वीरता की घटनाएं हमें आशा की किरण दिखाती हैं। दिल्ली पुलिस के इन जांबाजों ने अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण और निष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी इस बहादुरी को सलाम!


