
नई दिल्ली : पुलिस और पब्लिक की सहभागिता निश्चित तौर से समाज के लिए असरदार परिणाम देती है। ऐसा ही एक वाक्य दक्षिणी दिल्ली जिले के लोधी कॉलोनी थाने में सामने आया। कल लोधी कालोनी थाना पुलिस एक महिला के साथ एक लड़की को थाने में लेकर आई। लड़की की उम्र तकरीबन 15 साल थी, यह लड़की बेहद मानसिक अवसाद (तनाव) में थी। पुलिस ने लड़की को सहूलियत से बैठाया और उससे उसके बारे में पूछताछ की तो लड़की ने कुछ नहीं बताया और चुप्पी साधे रही। कई घंटे पुलिस उससे जानकारी लेने का प्रयास करती रही मगर लड़की ने अपने बारे में कुछ नहीं बताया। इसी बीच पुलिस ने आसपास के थानों में किसी लड़की की गुमशुदगी की जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
यह लड़की मौन थी और कुछ भी नही बता रही थी, इसलिए पुलिस अपने तकनीकी माध्यम का सहारा नहीं ले पा रही थी। थाने की महिला पुलिस स्टाफ की काफी मशक्क्त के करने बाद लड़की ने थोड़ी थोड़ी जानकारी देना शुरू की, उससे पुलिस को काफी मदद मिली। पुलिस को जितनी जानकारी मिली उसको ज़िप नेट पर सर्च किया तो पता लगा लड़की एक महीने से अधिक समय से गुमशुदा थी। लड़की की गुमशुदगी की सूचना 6 जून को दिल्ली के गोविंदपुरी थाने में दर्ज करवाई गई थी। लोधी कॉलोनी पुलिस ने गोविन्दपुरी थाने को इसकी सूचना दी। गोविन्दपुरी थाने से पुलिस और इस लड़की के परिवार के लोग लोधी कॉलोनी थाने पहुँच गए. एक महीने से अपनी बेटी के बिछुड़ने का दुःख झेल रही माँ अपनी बेटी को सामने देखकर भावुक हो गई और पुलिस को धन्यवाद दिया ।
पुलिस ने जब सारे मामले की कड़ियाँ जोड़ी तो पता चला इस लड़की का परिवार उत्तर प्रदेश के कन्नौज का रहने वाला है और एक साल पहले दिल्ली की बंगाली कॉलोनी, गोविन्द पुरी में रहने आया था। लड़की 8 में कक्षा की छात्रा थी। पढ़ाई को लेकर परिवार के लोगों की डांट से दुःखी होकर घर छोड़ कर निकल गई। 5 जून को घर से निकली थी, 6 जून को पुलिस को इसकी गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवाई गई.
इस सारे प्रकरण में पुलिस के साथ साथ एक गरीब परिवार की महिला की भावनात्मक बात सामने आई है। लड़की ने बताया वह दिल्ली के मंदिरों में दिन के वक्त बैठ जाती थी जो कोई खाने को देता उससे पेट भर लेती और रात में सुनसान झाड़ियों में अपने आपको छुपाकर सो जाती थी, इस तरह उसने एक महीना बिता दिया। अभी कुछ दिन पहले बारिश आई यह लड़की बारिश में भीग रही थी। रूपा नाम की महिला की नजर इस पर पड़ी, रूपा उसे घर ले गई । इस महिला ने इस लड़की को दिलासा दिया, उसने उसके माता पिता के बारे में पूछा लड़की ने कुछ नही बताया। रूपा एक गरीब महिला होने के बावजूद भी इसका अपनी सगी बेटी की तरह उसका ख्याल रखा, यहां तक खुद के लिए रोटी न होते हुए भी इसको भूखा सोने नही दिया । एक हफ्ते बाद रूपा ने अपने बीट अधिकारी को इस अंजान लड़की के बारे में बताया । बीट अधिकारी ने अपने थाना इंचार्च लोधी कॉलोनी को इसकी जानकारी दी, इसके बाद लड़की को तुरंत रूपा के साथ थाने लाया गया । थाने में आने के बाद पुलिस की कई घण्टों की कार्यवाही के बाद उस अनजान लड़की को उसके परिवार से मिलाप करवा दिया। रूपा के इस मानवीय कार्य के लिए उसकी सरहाना करते थाना इंचार्च सुनील ढाका ने आला अधिकारियों के निर्देशानुसार रूपा को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम के तौर पर राशि प्रदान की।

इसमें रूपा की जितनी तारीफ की जाए कम है लड़की को सुरक्षित आसरा देने के बाद पुलिस को सौंप दिया । ऐसे लोग पुलिस की आंख और कान हैं क्योंकि आज के खराब माहौल में दिल्ली जैसे शहर में एक 15 साल की लड़की का इस तरह अकेला घूमना किसी भी हादसे को अंजाम देने के लिए वहशियों के लिए खुला निमंत्रण था ।



Comments