
नई दिल्ली : एक हिन्दी फ़िल्म का बड़ा मशहूर गाना है “अपने लिए जीये तो क्या जीये, जिये तो जमाने के लिए..” यह महज फिल्मी लाइन नही है, आज कोरोना के संकटकाल में हकीकत बन कर सामने आ रही है I दिल्ली की पुलिस लॉक डाउन के वक्त दिल्ली के लोगों के लिए उन कामों को कर रही है जो उनके दायरे में नही आते हैं I
उत्तर पश्चिमी दिल्ली के अशोक विहार थाने में तैनात दयावीर नाम के सिपाही ने अपने नाम के अनुरूप मानव सेवा का ऐसा काम किया है जिसकी चारो तरफ तारीफ हो रही है I अशोक विहार बी-ब्लाक, वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में रहने वाली अनुता नाम की महिला को अचानक प्रसव पीड़ा हुई ! लॉकडाउन की वजह से अस्पताल जाने के लिए कोई साधन नही मिला, परिवार के लोगों ने हर प्रयास कर लिया मगर सब कोशिश बेकार रही I उसी दौरान किसी पड़ोसी ने उसके पति अशोक को थाने में फोन करने की सलाह दी I अशोक ने थाने में इस बात की जानकारी दी ओर मदद की गुहार लगाई I

थाना प्रभारी आरती शर्मा को दी इस बात की जानकारी दी गई I SHO आरती शर्मा ने एक महिला होने के स्तिथि की गंभीरता को समझते हुए तुरंत अपने सिपाही दयावीर को महिला के घर रवाना कर दिया I दयावीर ने भी किसी सरकारी वाहन का इंतजार न करके अपनी निजी कार को थाने से निकाल कर अनुता के घर पहुंचा I महिला और उसके परिवार के सदस्य को कार में लेकर बाड़ा हिंदूराव अस्पताल पहुंचा I शाम करीब सवा सात बझे अनुता ने एक बेटे को जन्म दिया I थाने के स्टाफ को जब इस बात की जानकारी मिली तो सभी को खुशी का अहसास हुआ I
यह परिवार पुलिस द्वारा की गई मदद से का इतना अहसानमंद हो गया है कि बेटे का नाम सिपाही दयावीर के नाम पर रख दिया I परिवार ने कहा यदि बेटी होती तो उसका नाम थाने की SHO आरती शर्मा के नाम पर `आरती’ रखते I
पुलिस दौयम दर्जे का कार्य कर रही है, एक तरफ कानून व्यवस्था को बनाकर रख रही है दूसरी तरफ मानव धर्म का पालन भी कर रही है I पुलिस की सहायता से आज महिला औऱ उसका नवजात शिशु दोनों स्वस्थ हैं I SHO ने व्यक्तिगत रूप से इस परिवार को हर संभव मदद करने की बात कही है I



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