
नई दिल्ली : #Delhi_Police: दिल्ली पुलिस कभी कभी ऐसा कारनामा कर देती है जिसपर यकीन करना बामुश्किल होता है ।दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर अपनी दरियादिली और इंसानियत की मिसाल पेश की है। दरअसल, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट दिल्ली के थाना सब्जी मंडी के SHO ने एक गरीब बच्चे को साइकिल दिलाकर उसकी खुशी में चार चांद लगा दिए। अब इसमें सवाल यह उठता है कि इसमें पुलिस ने ऐसा कौन सा बड़ा काम कर डाला जो यह खबर बन गई ? इस सवाल का जवाब भावनात्मक है और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा है ।
अक्सर लोग पुलिस को कठोर प्रशासक का दर्जा देते हैं । कई बार आपने देखा होगा सड़कों पर शैतानी कर रहे बच्चों को डराने के लिए माता पिता भी कह देते हैं ” पुलिस वाला पकड़ कर ले जायेगा”. किंतु जब एक 10 साल का बच्चा बिना।किसी खौफ के थाने में आकर पुलिस को अपनी परेशानी बयां करे तो समझ लेना चाहिए दिल्ली पुलिस पब्लिक से भावनात्मक रूप से जुड़ रही है ।
मामला कुछ इस प्रकार है :
कल नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सब्जी मंडी थाने में एक छोटा बच्चा तरुण जिसकी उम्र तकरीबन 9-10 साल होगी, रोता हुआ थाने आया । थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब उससे आने का कारण पूछा, तो उसने बताया कि वह मित्रा वाली गली में रहता है और घर के बाहर से उसकी साइकिल कोई चुराकर ले गया है । पिता मदनलाल गरीब हैं और गत्ते की एल्बम बनाने का काम करते हैं । उनके पास इतने पैसा नहीं जो उसे साइकिल खरीद कर दे सकें । स्कूल भी दूर है बिना साइकिल के स्कूल कैसे जायेगा ?
पुलिस कर्मी बच्चे की बात सुनकर बच्चे को SHO राम मनोहर मिश्रा के पास ले गए, उसे रोता देख थाना प्रभारी का दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत बच्चे को दिलासा दिया और उस बच्चे को कुछ खिलाया पिलाया। इसके बाद उन्होंने अपने वेतन के पैसे से बच्चे के लिए एक नई साइकिल खरीदी।।जब बच्चे को नई साइकिल मिली, यह सब उसको सपने जैसा लगा उसको यकीन नही हुआ कि पुलिस ऐसा भी कुछ कर सकती है। साइकिल पाकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

दिल्ली पुलिस की यह पहल वाकई काबिले तारीफ है। यह दर्शाता है कि दिल्ली पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करने के लिए भी हमेशा तैयार रहती है। इस सारे किस्से में खास बात यह है कि बच्चे के मासूम दिल में दिल्ली पुलिस की जो तस्वीर बनी है वह उसको जिंदगी भर याद रहेगी ।
यह घटना दिल्ली पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करती है और यह दर्शाती है कि वे केवल अपनी कानूनी ड्यूटी ही नहीं निभाते हैं, बल्कि समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। आखिर खाकी के अंदर भी इंसानियत का दिल धड़कता है ।


