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76 गुमशुदा बच्चों को एक महिला हवलदार ने ढूंढ निकाला

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दिल्ली के 76 गुमशुदा बच्चोँ को तलाशने वाली महिला हवलदार सीमा ढाका

नई दिल्ली : मशक्कत के मंसूबों को लेकर अपने कर्तव्य के प्रति वफादारी निभाने वालों को निश्चित तौर से जीत मिलती है । ऐसी ही एक जीत की हकदार थी दिल्ली पुलिस में तैनात महिला हवलदार सीमा ढाका, जो वर्तमान में आउटर नार्थ के समयपुर बादली थाने में तैनात है । दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता उपायुक्त ईश सिंघल के अनुसार सीमा ने तीन महीने में 76 गुमशुदा बच्चों को तलाश करके काबिले तारीफ कार्य किया है लिहाजा सीमा ढाका की पदोन्नति करके उनको दिल्ली पुलिस के आयुक्त के आदेशानुसार एएसआई {ASI} बना दिया गया है ।
सीमा ढाका 2006 में सिपाही के पद पर भर्ती हुई थी । 2014 में बी-1 की विभागीय परीक्षा देकर हवलदार बन गई । सीमा ढाका मूलतः श्यामली की रहने वाली है, विवाह बड़ौत में हुआ था । सीमा के पति भी दिल्ली पुलिस में हवलदार हैं और नार्थ रोहिणी थाने में तैनात हैं । सीमा का एक 8 साल का बेटा भी है ।
दिल्ली में गुमशुदा बच्चों के आवाज संसद में भी उठाई जा चुकी है । बच्चों के अविभावक भी अपने बच्चों को लेकर दिल्ली के अलग अलग जगहों पर प्रदर्शन कर चुके हैं ।
अभी तक के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में अभी तक 57261 बच्चों की गुमसुदगी दर्ज की गई है जिसमें 21631 बच्चे तलाश किये जा चुके हैं । इसमें प्रमुख बात यह है की दिल्ली पुलिस ने पिछले तीन महीनों में 1440 बच्चों की तलाश कर उनको उनके परिवारों के सुपूर्द किया है ।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसo एनo श्रीवास्तव के पदभार ग्रहण।करने के बाद गुमशुदा बच्चों की खोज में तेजी आई है । इसी कड़ी में सीमा ढाका को इसी वर्ष अगस्त में गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई । सीमा ने तकरीबन तीन महीने में 76 बच्चों को ढूंढ कर अपनी काबिलियत का प्रमाण प्रस्तुत कर आला अधिकारियों को गदगद कर दिया है ।
सीमा ढाका ने तकरीबन अपहरण किये हुए बच्चों को तलाश कर उनके रोते तड़पते परिवारों को दिल्ली सकून दिया है । कुछ ऐसे भी माँ बाप हैं जो अपने बच्चों को पाने की आस गवां चुके थे । आज जब उनके बच्चे उनकी गोद में फिर से आ गए हैं तो उनको अपनी आंखों पर विश्वास करना मुशिकल हो रहा है । वे लोग अपने जिगर के टुकड़ों को अपने जिगर के करीब पाकर दिल्ली पुलिस को अनेकों दुआएं दे रहे हैं।
सीमा के इस कामयाब सफर में उसके द्वारा बनाई गई अपनी रणनीति काम आई ।  बिना हतोत्साहित हुए उसने रेलवे स्टेशनों से लेकर बस अड्डों पर नशे के आगोश में आये बच्चों के बीच अपनी तलाश जारी रखी और बड़ी संख्या में बच्चों को ढूंढ निकाला । इसमें ऐसी नाबालिग लडकियों को भी उनके रोते परिवारों से मिलवा दिया जो प्रेम जाल के झांसे में आकर घर से भाग चुकी थी ।
इस तरह एक महिला पुलिसकर्मी के कामकाज ने गुमशुदा बच्चों के प्रति दिल्ली पुलिस की गंभीरता का समाज को अहसास करवाया है । एक महिला पुलिसकर्मी होने के बावजूद प्रबल इच्छाशक्ति ने निश्चित तौर से दिल्ली पुलिस को गौरान्वित किया है ।

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