
नई दिल्ली : सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में करोल बाग पुलिस स्टेशन की टीम ने एक शातिर “ईरानी गिरोह का भंडाफोड़ किया है । यह गैंग सीबीआई अधिकारी बनकर धोखाधड़ी करके लोगों का माल लेकर चंपत हो जाते थे । पुलिस को काफी लंबे वक्त से इनकी तालाश थी । फिलहाल पुलिस ने इस ईरानी गैंग के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है । इनके पास से 3 सोने की चेन, 8 मोबाइल फोन, 2 टार्च और 5 नकली सीबीआई के पहचान पत्र बरामद किए गए हैं । इन आरोपियों को देश के विभिन्न राज्यों में अपराधी घोषित किया गया है ।
27 जून को, करोल बाग में बैंक स्ट्रीट पर सीबीआई अधिकारी बन कर 300 ग्राम सोना छीनने की एक पीसीआर कॉल मिली । पुलिस को पीड़ित से पूछताछ से यह पता चला कि पीड़ित SR ज्वेलर्स का कर्मचारी है । जब वह बैग में सोना लेकर निकला तो उसे रास्ते में 4 से 5 लोगों ने सीबीआई अधिकारियों के रूप में उसका बैग जांच के लिए मांगा । जब उसने मना किया तो उससे जबरन बैग देखने के बहाने 300 ग्राम सोने का सामान लेकर फरार हो गए । यह सारी घटना फिल्म “स्पेशल 26” की तरह लग रही थी
करोल बाग थाने में।शिकायत दर्ज करने के बाद एसीपी विदुशी कौशिक, थाना प्रभारी मनीष जोशी ने इस केस का पर्दाफाश करने के लिए एक टीम तैयार की गई । सब इंस्पेक्टर सोहन लाल, सब इंस्पेक्टर विक्रम सिंह, आईएसआई जितेंद्र, हवलदार दिलशाद, रवि , सिपाही मोनू कुमार, ललित कुमार, पंकज कुमार और शिंबू दयाल को इसमें शामिल किया गया । आरोपी व्यक्तियों को पकड़ने के लिए गठित किया गया।
पुलिस की जांच टीम इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती वास्तविक अपराधियों की पहचान करना था । पुलिस के पास अपराधियों की पहचान का कोई सबूत नही था । अपराधियों के बारे में सिर्फ हुलिए की जानकारी थी जो पीड़ित ने दी थी ।
करोल बाजार से हनुमान मूर्ति तक, पुसा रोड लगभग 1 किमी तक सभी सीसीटीवी कैमरों को चैक किया गया। सीसीटीवी कैमरों ओर डोजियर की मदद से एक व्यक्ति की पहचान हो गई जो इसी तरह के एक मामले में मुजरिम था । उसका नाम अली @ मोहम्मद सबिर हुसैन ईरानी मोहल्ला रेलवे स्टेशन, भोपाल, मशयप्रदेश का रहने वाला था ।
सब इंस्पेक्टर सोहन लाल के नेतृत्व में एक टीम भोपाल को भेजी गई थी । पुलिस टीम को वहां अली मोहम्मद नही मिला मगर काफी जानकारी जुटाकर वापस आ गई। पुलिस ने IRCTC के यात्रियों का आंकड़े एकत्र किए और उससे यह पता चला कि 26 जून को, कुल पांच व्यक्ति भोपाल से दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने 30 जून के लिए अपनी वापसी टिकट बुक की थी। पुलिस को शंका हुई कहीं यह पांचों वही अपराधी तो नही जिनकी पुलिस को तलाश है । मोहम्मद अली @ मोहम्मद साबिर के फोन की लोकेशन निकाली गई तो पता चला यह वारदात के वक्त करोल बाग में मौजूद था । इसके बाद भोपाल मे कई ठिकानों पर छापे मारे गए । मध्य प्रदेश में मोहम्मद साबिर के नए ठिकानों पर भी निगरानी रखी गई मगर असफलता हाँथ लगी ।
पुलिस ने फिर IRCTC से यात्रियों का डाटा खंगाला। उससे पता चला 1 अगस्त को मोहम्मद साबिर नाम के व्यक्ति ने भोपाल से इलाहाबाद तक कि यात्रा की थी । पुलिस ने आधी रात झांसी जंक्शन में आरोपी की खोज की मगर मोहम्मद अली @ मोहम्मद सबिर हुसैन को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया गया । मोहम्मद अली ने अपने गुनाह कर लिया ।

इसके बाद पुलिस ने मोहम्मद काबली (46), अनवर अली (45), शौकत अली जाफरी (55) मुख्तयार हुसैन (35) पांच आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया है

सभी आरोपी ईरानी वंश के हैं और इनका गैंग इसी नाम से चलता है । कई दशकों पहले इनके पूर्वज भारत आए थे। यह सभी आरोपी रेलवे स्टेशन, भोपाल मध्य प्रदेश के पास ईरानी मोहल्ले में रह रहे हैं।

आरोपी शौकत अली और अनवर अली पहले रेलवे स्टेशन पर जेबतराशी किया करते थे । उसके बाद उन्होंने अपने गिरोहों का विस्तार अपने रिश्तेदारों को जोड़ कर किया ।
शरीर से लंबे चौड़े होने से पुलिस वालों की तरह दिखते थे ।

गैंग के लोगों ने पुलिस के रंग ढंग सीख लिए थे। फ़र्ज़ी CBI अधिकारी के पहचान पत्र बनवा लिए थे । अपने आपको CBI का अधिकारी कभी पुलिस का अधिकारी बता कर लोगों का माल लेकर फरार हो जाते थे ।

यह ईरानी गैंग बाज़ारों में 15 अगस्त, 26 जनवरी के आसपास सक्रिय हो जाते थे । उस वक्त दिल्ली की सुरक्षा का हवाला देकर ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं । यह अक्सर बाजारों में आभूषणों की मार्किटों, मनी एक्सचेंज के आफिस के पास अपना शिकार ढूंढते थे ।

यह सभी 25 से अधिक मामलों में शामिल हैं और 10 से अधिक मामलों में अपराधी (पीओ) घोषित हैं । पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी, पुलिस भी इनको ढूंढ रही हैं।


