
नई दिल्ली : आज समाज में पारिवारिक परिवेश में विचारों का परिवर्तन तेजी से देखा जा रहा है । परिवारों में अविभावको की मान्यताएँ बच्चों को गौण प्रतीत होती हैं जिसे न मानकर युवक युवती ऐसे कदम उठा लेते हैं जो उनको भविष्य की गहरी खाई में ले जाते हैं । वक्त रहते यदि किसी ने थाम लिया तो बच जाते हैं वरना खुद ही अपने जीवन को गर्त में डाल देते हैं । कल दिल्ली पुलिस के तीन जवानों ने एक ऐसी ही लड़की की जिंदगी को बर्बाद होने से बचा लिया वरना आधी रात को दिल्ली जैसे शहर में इस अकेली लड़की को शैतानी आंखे ढूंढ ही लेती ।


रात तकरीब 12 बजे कमला मार्किट थाने के तीन सिपाही रत्न लाल, महेश और अनुज रेलवे स्टेशन की तरफ गश्त कर रहे थे । इनको वहां तिकोना पार्क के पास अंधेरे कौने में कोई छुपा हुआ नजर आया । तीनों ने पास जाकर देखा तो एक लड़की घबराई हुई सी थी, पुलिस को देखा तो रोने लगी, इन तीनों ने उसकी मदद करने का भरोसा देकर उसे शांत किया । इन तीनों ने हालात की सूचना थाना इंचार्ज लेखराज सिंह को सूचना दी ।
थाना इंचार्ज ने कमलां मार्किट ACP अनिल कुमार को आधी रात में इस लड़की के स्टाफ द्वारा मिलने की जानकारी दी । एसीपी के आदेश पर तुरंत थाने से महिला पुलिस कर्मी को वाहन द्वारा मौके के लिए रवाना कर दिया गया ।

लड़की को थाने लाकर उससे उसके परिवार के बारे में पूछा गया तो लड़की ने काफी देर तक कुछ नही बताया । मगर पुलिस के व्यवहार से जब वह आश्वस्त हो गई तो उसने बताया उसका परिवार बिहार से दिल्ली आकर रह रहा है । कुछ दिनों से परिवार वालों की डांट से परेशान होकर उसने अपने परिवार से दूर जाने का फैसला ले लिया ।

यह घर छोड़कर स्टेशन पर आई, मगर ट्रैन न होने के कारण उसे रुकना पड़ा, वापिस घर जा नही सकती थी इसलिए खुद को छुपाने के पार्क के लिए पार्क के अंधेरे कोने का सहारा लेकर खड़ी थी ।
पुलिस ने इसकी बात सुनकर, सुबह से भूखी इस लड़की को खाना खिलाया, फिर परिवार से सम्पर्क किया । बेटी की खबर लगते ही माता पिता भी कुछ घँटों बाद थाने आ गए । अपने बेटी को सामने पाकर भरी आंखों से कमलां मार्किट के तीनों सिपाहियों का हाँथ जोड़ कर धन्यवाद दिया ।
सेंट्रल डिस्ट्रक्ट डीसीपी संजय भाटिया का ने बताया कि युवती तकरीबन 20 साल की और परिवार की डांट के कारण उसने इतना कठिन फैसला ले लिया । महिलाओं के साथ बढ़ते अपराधों के कारण पुलिस को महिला सुरक्षा की हर पल चिंता रहती है, गनीमत यह रही हमारा स्टाफ अलर्ट था, खासकर स्टेशन पर हम स्टाफ की गश्त को ज्यादा तवज्जों देते हैं । स्टाफ की भूमिका वाकई सराहनीय है ।
इस सारे मामले में गौरतलब बात यह है कि पुलिस दल की ततपरता ने निश्चित तौर से हैवानों की दुनियां से चंद फासले पर खड़ी लड़की को बचा लिया । दिल्ली के सैक्स बाजार के बहुत से एजेंट स्टेशन के आसपास ऐसी ही लड़कियों पर नजर रखते हैं जो घर से भाग कर या रोजगार की तलाश में आ जाती है । ऐसी अकेली लड़कियों को चंद मिनटों में गुमराह करके जिस्मफरोशी के दलदल में डाल दिया जाता है । इस लड़की की किस्मत अच्छी थी जो पुलिस वक्त पर रहनुमा बनकर सामने आ गई ।



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