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23 June : दिल्ली विश्विद्यालय में पहली बार स्वामी रामदेव ने चलाई अपनी योग क्लास

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली विशवविद्यालय में योग से पूर्व राष्ट्रीयगान करते हुए

रामदेव ने कहा “राजनीति में हो योग, लेकिन योग में न हो राजनीति अग्निवीर योगपथ अपनाते तो कभी हिंसा नहीं करते। देश तोड़ने का एजेंडा चलाने वालों प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी, गृह मंत्री अमित शाह,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पियूष गोयल पर राज राजयोग है इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” 

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 8वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित योग सप्ताह के दूसरे दिन पतंजलि आयुर्वेद और योगपीठ, हरिद्वार के संस्थापक योग ऋषि स्वामी रामदेव ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। इस दौरान उन्होने योग के विषय में विस्तार से बताने व योगाभ्यास करवाने के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। दिल्ली विश्वविद्यालय स्टेडियम के बहुउद्देशीय हॉल में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में संबोधित करते हुए योग ऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि योग राजनीति में भी होना चाहिए, लेकिन योग में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

स्वामी रामदेव ने कहा कि योग बड़ा सहज काम है इसलिए इसे सहज योग और सहज समाधि कहा गया है। समाधि अष्टांग योग है। उन्होने योग पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि योग आत्म अनुशासन है, आत्म प्रेरणा है और आत्म विश्लेषण के साथ इसके बहुत से आयाम हैं। शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहना तथा अपने मन, विचार व भावनाओं को काबू में रखना ही योग है। उन्होने तीन विषयों योग का बोध, योग का अभ्यास और योग का आचरण पर विस्तार से बात की। स्वामी रामदेव ने बताया कि उन्होने  4 वेदों, 113 उपनिषदों, रामायण, महाभारत, पुराणों और श्री मदभगवद गीता में लाखों श्लोक सूत्र मंत्र पढे हैं जिनमें से 10 हजार से ज्यादा उन्हें याद हैं। स्वामी रामदेव ने योगाभ्यास के दौरान प्राणायाम और आसन का 5-5 का पैकेज दिया। उन्होने बेसिक योग के साथ एडवांस योग और थेरापीटीक योग भी सिखाया। उन्होने कहा कि इस पर उन्होने रिसर्च किया है और 500 से अधिक रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं। उन्होने कहा कि योग से शरीर बल बढ़ता है और बॉडी फिट रहती है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली विशवविद्यालय के स्टेडियम में योग करते हुए

स्वामी रामदेव ने कहा कि दिल्ली विश्वविधालय बहुत बड़ा नाम है। यह सौ साल का विश्वविधालय है। उन्होने कहा कि उन्होने शिक्षार्जन के दौरान कभी विश्वविधालय का गेट तक नहीं देखा, वह तो गुरु शिष्य परंपरा में पेड़ के नीचे पढ़ने वाले छात्र रहे हैं, लेकिन आज वे पतंजलि विश्वविधालय के आजीवन चांसलर हैं। उन्होने कहा कि वह 100 साल तक इसके माध्यम से एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाकर और देशभक्त नागरिक बनाकर इस दुनिया से जाएंगे।

योग ऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि योग सर्वव्यापी है, राजनीति में भी योग होना चाहिए जिससे नरेंद्र मोदी जैसे देव तुल्य व्यक्तित्व खड़े होंगे। उन्होने शिक्षा में योग के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि योग शिक्षा में भी होना चाहिए और चिकित्सा व आर्मी में भी योग होना चाहिए। उन्होने अंत में कहा कि ज़िंदगी में अगर कामयाबी चाहिए तो जुबान के सच्चे और अच्छे बनो। जो बात का सच्चा और लंगोट का पक्का हो उसे दुनिया में कोई नहीं हरा सकता। उन्होने 7 लाख की बड़ी विद्यार्थी संख्या वाले इतने बड़े दिल्ली विश्वविद्यालय के कुशल संचालन के लिए डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह को बधाई भी दी।

योग गुरु स्वामी राम देव का सम्मान करते हुए दिल्ली विश्वविधालय के वीसी योगश सिंह

इस अवसर पर समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस योग शिविर के आयोजन के लिए डीयू को बधाई दी। उन्होने बताया कि इस वर्ष योग दिवस का थीम “मानवता के लिए योग” था। इसके साथ ही उन्होने स्वामी रामदेव का स्वागत करते हुए कहा कि योग और बाबा रामदेव पर्यायवाची बन चुके हैं। उन्होने कहा कि आजादी के अमृत काल में हमें विश्लेषण करना है कि पिछले 75 वर्ष में हम कैसे चले और आगे 2047 तक जब देश आजादी का शताब्दी वर्ष मना रहा होगा तब हम कहाँ पहुंचेंगे। इसके लिए रोड़ मैप तैयार करना है और इस रोड़ मैप के लिए जहां अनेकों लोग लगे हैं वहीं विश्वविद्यालय भी अपना काम कर रहे हैं। उन्होने योग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आसन, प्राणायाम और ध्यान सम्पूर्ण योग है जो शरीर के मुख्य चार अंगों को खुराक देता है। इससे नकारात्मक विचार खत्म होते हैं और श्रेष्ठता आती है। योग का अर्थ मन, बुद्धि और आत्मा को जोड़ना है। जब ये जोड़ पूरा होता है तभी भारतीय पद्धति के अनुसार योग होता है।

दिल्ली विशवविद्यालय के स्टेडियम में योग करते हुए शिक्षक, छात्र, बुद्धिजीवी वर्ग

अर्जुन राम मेघवाल ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने पर समर्थन दिया था। उसके बाद यूएनओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को मजबूती से समझाया तो 170 से अधिक देशों ने इसका समर्थन किया और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित हुआ।

मेघवाल ने कहा कि 19 वीं शताब्दी यूरोप की थी और लीड रोल में इंग्लैंड था। फिर 20 वीं शताब्दी उत्तरी अमरीका की रही और लीड रोल में यूएसए रहा। अब 21 वीं शताब्दी को एशिया की तो माना जा चुका है, लेकिन लीड रोल के लिए भारत, चीन, जापान और यूरेशीय नामक 4 देशों के बीच स्पर्धा हैं। भारत को इसके लीड रोल में आना है। उन्होने कहा कि 21 जून को दुनिया योग कर रही है जिससे साबित होता है कि योग में तो हम लीड रोल में आ चुके हैं, अन्य क्षेत्रों में भी भारत लीड रोल में आएगा।

समारोह के आरंभ में डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने योग ऋषि स्वामी रामदेव, केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और अन्य सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होने अपने संबोधन में कहा कि इस योग सप्ताह के दौरान स्वामी रामदेव का डीयू में आना हमारे लिए गौरव और सम्मान की बात है। उन्होने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने गौरवपूर्ण 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। ये उपलब्धियों और अभिमान के सौ 100 वर्ष हैं। उन्होने योग को लेकर स्वामी रामदेव की सराहना करते हुए कहा कि स्वामी रामदेव ने योग को बहुत सहज और सरल बनाया है। इसके साथ ही उन्होने केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का स्वागत करते हुए उनके एक प्रशासनिक सेवा से लेकर राजनैतिक जीवन तक की चर्चा भी की। उन्होने कहा कि मेघवाल एक अच्छे प्रशासक भी रहे हैं और अब केंद्रीय मंत्री के रूप में भी सराहनीय कार्य कर रहे हैं। कुलपति ने योग पर चर्चा करते हुए कहा कि तन और मन में संतुलन बनाने का नाम ही योग है और आज हम स्वामी रामदेव से उसी योग की बारीकियों को सीखेंगे। इस अवसर पर  योग ऋषि स्वामी रामदेव, केंद्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल व अन्य अतिथियों को शाल, स्मारक सिक्के और पुस्तकों के साथ सम्मानित भी किया गया।

समारोह के दौरान गांधी भवन के निदेशक प्रो. केपी सिंह, डीन ऑफ कालेजेज़ प्रो. बलराम पाणी, निदेशक साउथ कैम्पस डॉ श्री प्रकाश सिंह, ओपन लर्निंग कैम्पस की निदेशक प्रो. पायल मागो, प्रोक्टर प्रो. रजनी अब्बी, कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता एवं पीआरओ अनूप लाठर सहित अनेकों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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